Mayawati: बसपा प्रमुख मायावती ने UPI डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाने की नई व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. X पर किए पोस्ट में उन्होंने कहा कि पहले UPI डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था से जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. उन्होंने इसे प्रथमदृष्टया मुनाफाखोरी वाले पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से टैक्स वसूली जैसा बताया और कहा कि इससे लोगों में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है.
‘15 अक्टूबर से व्यवस्था लागू, जेब आम जनता की कटेगी’
मायावती ने कहा कि सरकार भले ही इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ वाली व्यवस्था को ‘कर’ मानने के लिए तैयार न हो, लेकिन 15 अक्टूबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो नाम दिया जाए, अंततः आम जनता की जेब पर इसका असर पड़ेगा और उसका खर्च बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है, जबकि उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोजगारी और अव्यवस्था जैसी समस्याओं से प्रभावित हैं.
सरकार की नीति कल्याणकारी होने की कही बात
बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे समय में सरकार की नीति और कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक व्यवस्था से अधिक कल्याणकारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जनता की तंगी और दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिंता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा. मायावती ने अपने पोस्ट के जरिए जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था को लेकर सरकार से अपनी नीति पर विचार करने की अपील की.
14,500 स्कूलों को स्मार्ट बनाने की घोषणा पर भी सवाल
मायावती ने यूपी सरकार की करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के करीब 14,500 स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा का भी जिक्र किया. उन्होंने इसे अच्छी बात बताते हुए कहा कि बच्चों को ‘स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले बुनियादी शिक्षा से जुड़ी जरूरतें पूरी करना जरूरी है. उनके मुताबिक स्कूलों में बच्चों के सिर पर छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की सही व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये में ये सभी व्यवस्थाएं पूरी हो पाएंगी या नहीं, इस पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए.
