UP News: नागपंचमी का दिन और 70 साल के बुधिराम का बदला हुआ अंदाज... नांद में रखा भूसा-चारा और उसे खाने के लिए जुटी लोगों की भीड़. महराजगंज के रुद्रपुर शिवनाथ गांव की यह कहानी इन दिनों लोगों की उत्सुकता बढ़ा रही है. ग्रामीणों का दावा है कि नागपंचमी पर बुधिराम के शरीर में ‘महिषासुर’ आते हैं और इसके बाद वह मवेशियों की तरह चारा खाने लगते हैं.
नागपंचमी आई तो नांद तक पहुंच गए बुधिराम
मामला महराजगंज के कोल्हुई थाना क्षेत्र के रुद्रपुर शिवनाथ गांव का है. यहां 70 वर्षीय बुधिराम को लेकर एक अजीबोगरीब मान्यता है. नागपंचमी के मौके पर उनके व्यवहार में बदलाव आने का दावा किया जाता है. बताया जाता है कि इस दौरान बुधिराम नांद में मुंह डालकर मवेशियों का चारा और भूसा खाने लगते हैं. इस बार भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला. इसे देखने के लिए गांव में लोगों की भीड़ जुट गई.
हर तीन साल में ‘वही कहानी’ दोहरने का दावा
ग्रामीणों और परिजनों के मुताबिक, बुधिराम के साथ यह घटना हर तीन साल में नागपंचमी के आसपास होने की बात कही जाती है. उनका दावा है कि इसी दौरान उनके शरीर में ‘महिषासुर’ आते हैं. यही वजह है कि नागपंचमी के मौके पर आसपास के लोगों में उन्हें देखने की उत्सुकता रहती है.
कौन हैं बुधिराम?
बुधिराम रुद्रपुर शिवनाथ गांव के रहने वाले हैं. उनकी उम्र करीब 70 साल है. वह यूपी रोडवेज विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी बताए जाते हैं.नागपंचमी पर उनके कथित बदले हुए व्यवहार की चर्चा गांव से निकलकर आसपास के इलाकों तक पहुंच चुकी है.
चारा खाने का VIDEO आया तो बढ़ी हलचल
बुधिराम के नांद में मुंह डालकर चारा खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है. वीडियो के बाद यह मामला और तेजी से चर्चा में आ गया. उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे. कई लोग इसे आस्था से जोड़ रहे हैं, तो कुछ लोग पूरे मामले को अलग नजरिए से देख रहे हैं.
बुधिराम के यहां क्यों पहुंचते हैं लोग?
स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता भी बताई जाती है कि बुधिराम के इस रूप को देखने और यहां मन्नत मांगने से मनोकामना पूरी होती है. इसी वजह से नागपंचमी पर उनके यहां लोगों की भीड़ जुटने का दावा किया जा रहा है.
महिषासुर आने का दावा, लेकिन पुष्टि नहीं
बुधिराम के शरीर में ‘महिषासुर’ आने और उनके मवेशियों की तरह चारा खाने की बात स्थानीय लोगों और परिजनों के दावे पर आधारित है. इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल नागपंचमी पर बुधिराम का यह कथित ‘अलग रूप’ महराजगंज में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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