यूपी रोडवेज साइबर अटैक: बिटकॉइन में मांगी 40 करोड़ की फिरौती, जानिए साइबर अपराधियों की क्यों है पहली पसंद

यूपी रोडवेज साइबर अटैक केस में हैकर्स का सच पता लगाने के साथ ही ऑनलाइन सेवाएं बहाल करने की कवायद शुरू हो गई है. साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक बिटकॉइन ब्लॉक चेन मैथड का प्रयोग करता है. ये चेन ट्रैक की जा सकती है. मगर, इस चेन को जिस डार्क वेब पर ब्राउज किया जाता है, उसे ट्रैक करना काफी कठिन है.

Lucknow: उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की ​टिकट बुकिंग वेबसाइट हैक होने के बाद साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. एक तरफ जहां यूपी रोडवेज की ऑनलाइन सेवाएं बहाल करने की कोशिश की जा रही है, वहीं इसके पीछे हैकर्स का सच जानने का भी प्रयास किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि मामले में बिटकॉइन में 40 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई है. साइबर हमलावरों ने दो दिन में फिरौती नहीं देने पर यह रकम बढ़ाकर 80 करोड़ करने की धमकी दी है.

शुरुआती जांच में रैनसमवेयर हमले की पुष्टि

इसके बाद यूपी रोडवेज के जीएम आईटी यजुवेंद्र सिंह ने साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया है. इसके साथ ही तफ्तीश शुरू कर दी गई है. बताया जा रहा है कि शुरुआती जांच में रैनसमवेयर हमले की पुष्टि हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे हमलों में फिरौती मांगने वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है. हमले में सर्वर की फाइलों को इनक्रिप्ट कर दिया गया है. डिजास्टर रिकवरी क्लाउड का भी डाटा इनक्रिप्ट हो गया है.

सर्वर पर फिरौती का मैसेज फ्लैश

यूपी रोडवेज ने अपनी वेबसाइट को संभालने का जिम्मा एक निजी कंपनी मेसर्स ओरियन प्रो को 21 अप्रैल को काम दिया था. लेकिन, इसके चार दिन बाद ही उसका डाटा हैक होने से ऑनलाइन टिकटिंग सेवा और इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन ने काम करना बंद कर दिया है. अटैक के साथ ही सर्वर पर फिरौती का मैसेज फ्लैश कराया गया. इससे विभाग में हड़कंप मच गया.

डाटा रिकवरी कर पाना बेहद मुश्किल

अब हैकर्स का सच पता लगाने के साथ ही ऑनलाइन सेवाएं बहाल करने की कवायद शुरू हो गई है. हालांकि जानकारों के मुताबिक ये इतना आसान नहीं है. डाटा रिकवरी कर पाना बेहद मुश्किल है. वहीं उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक संजय कुमार के मुताबिक ऑनलाइन सेवाएं तकनीकी कारणों से बाधित हो गई हैं. ऑनलाइन टेक्निशियंस सेवाओं को बहाल करने में गतिशील है. सेवाएं पुनर्स्थापित होते ही ऑनलाइन सेवा पुनः प्रारंभ हो जाएंगी.

बिटकॉइन क्या है क्यों हैकर्स करते हैं डिमांड

दरअसल बिटकॉइन इनोवेटिव टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तमाल ग्लोबल पेमेंट के लिए किया जा रहा है. देखा जाए यह आभासी मुद्रा है. कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए इस मुद्रा से बिना किसी बैंक के ट्रंजेक्शन किया जा सकता है. यह करेंसी सिर्फ कोड में होती है. इसलिए इसे जब्त भी नहीं किया जा सकता. इस डिजिटल करेंसी को डिजिटल वॉलेट में भी रखा जाता है. बिटकॉइन को क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है.

बिटकॉइन में वापस नहीं लिया जा सकता ट्रांजेक्शन

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक बिटकॉइन ब्लॉक चेन मेथड का प्रयोग करता है. ये चेन पूरी तरह से ट्रैक की जा सकती है. मगर इस चेन को जिस “डार्क वेब” पर ब्राउज किया जाता है उसे ट्रैक करना काफी कठिन है. बिटकॉइन का संचालन कंप्यूटर के विकेन्द्रीकृत नेटवर्क से किया जाता है. जहां ट्रांजेक्शन करने वालों की व्यक्तिगत जानकारियों की जरुरत नहीं होती है. क्रेडिट कार्ड या बैंक ट्रांजेक्शन के विपरीत इससे होने वाला ट्रांजेक्शन वापस नहीं लिया जा सकता है.

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By Sanjay Singh

working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.

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