लखनऊ में त्योहार से पहले बिगड़ा रसोई का बजट, खरीदारी से पहले जानिए दाल, चना और चीनी के ताजा भाव...

त्योहारी खरीदारी का समय है, लेकिन रसोई का बजट बिगड़ रहा है. अरहर दाल और चने के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ रहा है. वहीं, चीनी के दामों में राहत मिली है.

UP News: त्योहारी खरीदारी के बीच रसोई का बजट फिर बदलता दिख रहा है. चीनी के दामों में राहत मिली है, लेकिन अरहर दाल और चने ने जेब पर दबाव बढ़ा दिया है. राजधानी के बाजार में कुछ ही दिनों में अरहर दाल महंगी हुई है. वहीं, सरकार की सख्ती के बाद चीनी के थोक भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई है.

अरहर दाल में तीन रुपये तक तेजी

पांडेयगंज गल्ला मंडी के कारोबारी राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल के मुताबिक, पिछले दो-तीन दिनों में अच्छी गुणवत्ता वाली अरहर दाल के भाव बढ़े हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुखराज अरहर दाल का थोक रेट करीब 116 रुपये से बढ़कर 118.50 रुपये प्रति किलो हो गया है. मंडी कारोबारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से अरहर की आपूर्ति होती है. बिक्री बढ़ने और माल की उपलब्धता कम होने पर कीमतों में तेजी आती है.

चने के भाव भी चढ़े

अरहर के साथ चने की कीमतों में भी पहले से तेजी बनी हुई है. मंडी में 66 रुपये किलो वाला चना बढ़कर करीब 70 रुपये किलो हो गया है. वहीं, 69 रुपये किलो वाला चना 7400 रुपये के स्तर तक पहुंच गया है. फुटकर बाजार में चने का भाव 80 से 85 रुपये किलो तक बताया जा रहा है. किराना कारोबारी अनुसार, त्योहारी मांग का असर बाजार में साफ दिख रहा है.

फुटकर में महंगी हुई अरहर

फुटकर बाजार में भी दाल की बढ़ी कीमत का असर नजर आ रहा है. जो अरहर दाल पहले करीब 120 रुपये किलो बिक रही थी, उसका भाव अब 125 रुपये किलो तक पहुंच गया है. त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के साथ आपूर्ति प्रभावित होने पर कीमतों में और बदलाव की संभावना बनी हुई है. फिलहाल उपभोक्ताओं को दाल और चने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है.

चीनी ने दी राहत, थोक भाव में बड़ी गिरावट

दूसरी ओर, चीनी की कीमतों में उपभोक्ताओं को राहत मिली है. राजधानी के फुटकर बाजार में चीनी 64 रुपये से घटकर करीब 60 रुपये किलो हो गई है. थोक बाजार में भाव 62 रुपये से गिरकर 54 से 56 रुपये किलो तक पहुंच गया है. कारोबारियों के मुताबिक, सरकार की सख्ती और स्टॉक लिमिट घटाए जाने का असर कीमतों पर पड़ा है. 15 सितंबर से 30 नवंबर तक बड़े कारोबारियों की स्टॉक लिमिट 4000 क्विंटल से घटाकर 2000 क्विंटल किए जाने से बाजार में स्टॉक निकालने की रफ्तार बढ़ी है. इसका असर थोक कीमतों में ज्यादा साफ दिखाई दे रहा है.

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By अंजली कश्यप

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