लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, दावों और हकीकत के बीच फंसा सफर

Up News: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, जो तेज और सुगम यात्रा का वादा करता था, अब लगातार सड़क धंसने और महंगे टोल के कारण विवादों में है. यात्रा के अनुभव पर यात्रियों का भरोसा टूटा है, और कई लोग फिर से पुराने हाईवे का रुख कर रहे हैं. क्या यह एक्सप्रेसवे अपनी समस्याओं का समाधान कर पाएगा?

Up News: तेज और सुगम यात्रा का वादा करने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के बाद से विवादों में घिरा है. बार-बार सड़क धंसने, मरम्मत के लिए लगे बैरिकेडिंग और डायवर्जन के कारण यात्रियों का भरोसा टूटा है. जाजमऊ के कारोबारी फरहान के अनुसार एक्सप्रेसवे का टोल लगभग 290 रुपये है, जबकि पुराने हाईवे पर महज 100 रुपये लगते हैं. इसी महंगे टोल और समस्याओं के चलते लगभग 30 प्रतिशत वाहन फिर से पुराने हाईवे पर लौटने लगे हैं. वर्तमान में स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है.

एआई निगरानी के दावे और घटते ट्रैफिक के आंकड़े

63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में एआई मशीनों का उपयोग किया गया था। एनएचएआई का दावा था कि अगले 10 वर्षों तक यहां कोई गड्ढा नहीं होगा. इसके बावजूद 14 जुलाई के बाद पांच बार सड़क धंस चुकी है. एनएचएआई के अनुसार दैनिक वाहनों की संख्या 22-24 हजार से घटकर अब 18-20 हजार रह गई है. हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि सड़क पूरी तरह दुरुस्त होने और फिटनेस सुधार के बाद यात्री दोबारा लौटेंगे. फिलहाल लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने स्थिति सामान्य बताई है.

प्रशासनिक कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के कड़े आदेश

सड़क की लगातार खराब होती गुणवत्ता और यात्रियों की शिकायतों को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने जांच के सख्त आदेश दिए हैं. लापरवाही बरतने के आरोप में तीन संबंधित इंजीनियरों पर तुरंत कार्रवाई की गई है. हालांकि, एनएचएआई से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में बहुत से लोग केवल एक्सप्रेसवे का जायजा लेने आए थे. उनका मानना है कि छह महीने के बाद ही वास्तविक औसत ट्रैफिक का सही आकलन हो सकेगा. फिलहाल मरम्मत कार्य पूरे कर यातायात सुचारू कर दिया गया है.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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