मुरादाबाद में मानव-तेंदुआ संघर्ष पर बोलीं मंडलायुक्त संगीता सिंह, गन्ने के खेत बने वन्यजीवों का प्राकृतिक ठिकाना

UP News: मुरादाबाद में मानव और तेंदुओं के बीच बढ़ता संघर्ष चिंता का विषय बन गया है. मंडलायुक्त संगीता सिंह ने इस टकराव के भौगोलिक कारणों पर प्रकाश डाला है, जिसमें रामगंगा नदी का तटीय क्षेत्र और गन्ने की बेल्ट प्रमुख हैं. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं और एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार किया है.

UP News: मुरादाबाद की मंडलायुक्त संगीता सिंह ने मानव और तेंदुए के बीच बढ़ते टकराव पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बताया कि रामगंगा नदी का तटीय क्षेत्र और गन्ने की बेल्ट इस संघर्ष का मुख्य भौगोलिक कारण हैं. अनेक तेंदुओं का जन्म गन्ने के खेतों में ही हुआ है, जिसके कारण वे बचपन से इंसानी गतिविधियों के आदी हो चुके हैं. बिजनौर के बाद अब मुरादाबाद की तरफ तेंदुओं का पलायन बढ़ रहा है, जो इंसानी अतिक्रमण और वन्यजीवों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है.

पिंजरे लगाकर अब तक 14 तेंदुए किए गए रेस्क्यू

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाते हुए क्षेत्र में पिंजरे लगाए हैं, जिनके जरिए अब तक 12 से 14 तेंदुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है. मंडलायुक्त ने नागरिकों से सतर्कता बरतने, समूहों में निकलने, बच्चों को अकेले न छोड़ने और फसल बोने के पैटर्न में बदलाव करने का सुझाव दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों को दोष देने के बजाय हमें उनके साथ सहअस्तित्व की भावना विकसित करनी होगी और दीर्घकालिक रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा.

भविष्य के खतरों को टालने के लिए दीर्घकालिक मास्टर प्लान

मानव और वन्यजीव संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने एक संयुक्त मास्टर प्लान तैयार किया है. इसके तहत नदियों के तटीय क्षेत्रों और आवासीय बस्तियों के आसपास आधुनिक निगरानी कैमरे और ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं. साथ ही, कृषि वैज्ञानिकों की मदद से किसानों को गन्ने की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि तेंदुओं को गन्ने के खेतों में छिपने की जगह न मिले. सरकार और स्थानीय प्रशासन का लक्ष्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करते हुए मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सहअस्तित्व का वातावरण तैयार करना है.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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