गरीबी से निकलकर क्रिकेट के मैदान तक, KGBV की बेटी अंडर-19 वर्ल्ड कप चैंपियन में रचा इतिहास

UP News: उन्नाव के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की दो पूर्व छात्राओं, अर्चना देवी और निशा वर्मा ने विपरीत परिस्थितियों को पार कर क्रिकेट में सफलता हासिल की है. अर्चना अंडर-19 विश्व कप चैंपियन बनीं, जबकि निशा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं. उनकी कहानी सरकारी स्कूलों की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

UP News: कभी आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और मुश्किल हालात जिन बेटियों के सपनों के बीच सबसे बड़ी दीवार थे, आज वही बेटियां क्रिकेट के मैदान पर अपने हुनर का परचम लहरा रही हैं. उत्तर प्रदेश के उन्नाव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV), औरास की दो पूर्व छात्राओं अर्चना देवी और निशा वर्मा ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता. सोमवार को दोनों खिलाड़ी अपनी शिक्षिका पूनम के साथ बेसिक शिक्षा निदेशालय के राज्य परियोजना कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष, सफलता और भविष्य के सपनों को साझा किया और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों को बड़े लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल करने का संदेश दिया.

पिता के निधन के बाद बदली जिंदगी, KGBV से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

उन्नाव के एक छोटे से गांव की रहने वाली अर्चना देवी ने बताया कि बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था. परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि क्रिकेट क्या होता है. लेकिन जब उनका दाखिला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, औरास में हुआ तो शिक्षकों ने उनकी खेल प्रतिभा को पहचाना. यहीं से उनके क्रिकेट करियर की शुरुआत हुई. लगातार अभ्यास, मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई और भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया.

अंडर-19 विश्व कप जीतकर देश का बढ़ाया मान

लगातार मेहनत, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन के दम पर अर्चना ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया. अर्चना देवी वर्ष 2023 में आईसीसी अंडर-19 महिला टी-20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं. उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में खिलाड़ी की पहचान उसके खेल और प्रदर्शन से होती है, न कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति से. उन्होंने छात्राओं से अपील की कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने कहा कि संघर्ष कभी भी सपनों को छोटा नहीं कर सकता.

निशा वर्मा ने भी बनाई अलग पहचान, राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं

इसी विद्यालय की पूर्व छात्रा निशा वर्मा भी लगातार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं. वह उत्तर प्रदेश अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और बीसीसीआई की अंडर-19 महिला घरेलू प्रतियोगिता में भी खेल चुकी हैं. इतना ही नहीं, अक्टूबर 2024 में उनका चयन राष्ट्रीय नॉकआउट प्रतियोगिता के लिए उत्तर प्रदेश की टीम में हुआ. निशा ने कहा कि सफलता के रास्ते में उन्हें कई तरह की बातें सुननी पड़ीं, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. उनका मानना है कि आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और धैर्य ही किसी भी खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत होती है.

सरकारी स्कूलों की बेटियों के लिए बनीं मिसाल

आज अर्चना और निशा की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देख रही हैं. दोनों खिलाड़ियों ने छात्राओं से कहा कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई करना किसी भी तरह की कमजोरी नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और मेहनत के दम पर यहीं से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है. उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती, बल्कि उसे सिर्फ सही अवसर और मजबूत हौसले की जरूरत होती है.

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Published by: Lucky Kumari

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