सीतापुर में आकार ले रहा देश का पहला 'इको-स्पिरिचुअल' संसार! 14 करोड़ के 'वेदारण्यम' में क्या है ऐसा खास?

UP News: नैमिषारण्य में देश का पहला पारिस्थितिकी-आध्यात्मिक पार्क 'वेदारण्यम' तैयार हो रहा है. यह पार्क वैदिक संस्कृति, ऋषि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम होगा. प्रकृति के बीच आध्यात्मिक अनुभव का वादा.

UP News: नैमिषारण्य की धरती पर अब श्रद्धा के साथ प्रकृति का भी नया संसार आकार ले रहा है. ठाकुरनगर में हेलीपोर्ट के पास देश का पहला पारिस्थितिकी-आध्यात्मिक पार्क ‘वेदारण्यम’ तैयार किया जा रहा है. करीब 14.09 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पार्क वैदिक संस्कृति, ऋषि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण को एक ही जगह जोड़ने वाला है. करीब 10 हेक्टेयर में बनने वाले इस पार्क में दो लाख पौधे लगाए जाएंगे.

जमीन समतलीकरण का काम शुरू

वेदारण्यम का निर्माण उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम करा रहा है. फिलहाल परियोजना स्थल पर जमीन को समतल करने का काम शुरू हो चुका है. पार्क के पहले चरण के लिए छह करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है. परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति के बीच आध्यात्मिक अनुभव भी मिलेगा.

‘जहां प्रकृति अनादि ज्ञान से मिलती है’ होगी थीम

वन विभाग की कार्ययोजना के मुताबिक वेदारण्यम को ‘जहां प्रकृति अनादि ज्ञान से मिलती है’ थीम पर विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं है. प्रकृति के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक अनुभूति कराना भी इसकी खासियत होगी. पार्क में पेड़, पर्वत, नदी और जीव-जंतुओं के जरिए सनातन संस्कृति और ऋषि परंपरा को जीवंत रूप देने की योजना है.

30 फीसदी हिस्से में दिखेगी वैदिक वन परंपरा

पार्क के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में वैदिक वृक्ष लगाए जाएंगे. इनमें पीपल, बरगद, बेल, आंवला और शमी प्रमुख होंगे. सबसे खास बात यह होगी कि यहां देश के प्रसिद्ध वटवृक्षों की परंपरा भी दिखाई देगी. प्रयाग के अक्षयवट, नासिक के पंचवट, वृंदावन के वंशीवट, गया के गयावट और उज्जैन के सिद्धवट की कलम से वटवृक्ष तैयार किए जाएंगे. इसके अलावा पार्क के बाकी हिस्से में औषधीय पौधे लगाए जाएंगे. वैदिककालीन संरचनाओं को भी विकसित किया जाएगा.

सात जोन में दिखेगा वैदिक संस्कृति का अलग-अलग रंग

वेदारण्यम को सात थीम आधारित जोन में विकसित किया जाएगा. इनमें प्रकृति, ऋषि परंपरा, वैदिक जीवनशैली और आध्यात्मिकता के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाया जाएगा. पहला जोन: यहां 1.57 लाख से अधिक वैदिक वृक्ष लगाए जाएंगे. यह हिस्सा पार्क की हरियाली का प्रमुख केंद्र होगा. दूसरा जोन: यहां ऋषियों की जीवनशैली को करीब से समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा. तीसरा जोन: इसमें सूत गद्दी, ऋषि सभा और भ्रमण पथ विकसित किए जाएंगे. साथ ही वैदिक ध्वनियों की व्यवस्था होगी. चौथा जोन: यह मंत्र चिकित्सा पर आधारित होगा. यहां मंत्रों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभों की जानकारी दी जाएगी.

सिर्फ पार्क नहीं, वैदिक संस्कृति का अनुभव भी

वेदारण्यम को इस तरह विकसित करने की योजना है कि यहां आने वाला व्यक्ति सिर्फ हरियाली के बीच घूमे नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति और ऋषि परंपरा को भी करीब से महसूस कर सके. पेड़-पौधों से लेकर वैदिक संरचनाओं और मंत्र चिकित्सा तक, परियोजना में प्रकृति और अध्यात्म को साथ रखा गया है.नैमिषारण्य में तैयार हो रहा यह पार्क धार्मिक पर्यटन को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने वाली अनोखी पहल के रूप में सामने आ रहा है.

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By खुशी सिंह

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