हाथरस एसिड अटैक केस: दोषियों को 10-10 साल की सजा, 7 साल बाद पीड़िता को मिला न्याय, जानें क्या है पूरा मामला

Hathras Acid Attack: हाथरस में 7 साल पुराने तेजाब हमले के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है. मुख्य दोषी दो सगे भाइयों को 10-10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है. इस फैसले से पीड़ित को न्याय मिला है.

Hathras Acid Attack: हाथरस में सात साल पुराने चर्चित तेजाब हमले के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है. एडीजे विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) हर्ष अग्रवाल की अदालत ने मुख्य दोषी दो सगे भाइयों को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. दोनों पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. मामले में दोषी पाए गए दो अन्य आरोपियों को अदालत ने छह महीने की परिवीक्षा पर सदाचार बनाए रखने की शर्त के साथ रिहा करने का आदेश दिया है.

विरोध करने की रंजिश में किया था हमला

मामला 4 मई 2019 की शाम का है. हाथरस कोतवाली क्षेत्र की कांशीराम कॉलोनी निवासी नगीना पर पड़ोस में रहने वाले युवकों ने तेजाब से हमला किया था. पीड़िता के पति हरी सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि आरोपी डंपी उनकी पत्नी पर बुरी नजर रखता था. इसका विरोध करने और परिवार के लोगों से शिकायत करने की रंजिश में आरोपियों ने नगीना को सीढ़ियों पर अकेला पाकर घेर लिया और उस पर तेजाब फेंक दिया. हमले में वह बुरी तरह झुलस गई थीं.

फॉरेंसिक रिपोर्ट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की पुष्टि

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत ने डंपी और उसके भाई अडवानी उर्फ सत्यम के खिलाफ तेजाब हमला, मारपीट और धमकी देने की धाराओं में विचारण शुरू किया. वहीं अंकित और शीला के खिलाफ धमकी देने और गाली-गलौज से संबंधित आरोप तय किए गए थे. अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों को फैसले का आधार बनाया. फॉरेंसिक जांच में हमले में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के इस्तेमाल की पुष्टि हुई थी.

दो भाइयों को 10-10 साल की सजा, अंकित-शीला को परिवीक्षा

अदालत ने डंपी और अडवानी उर्फ सत्यम को तेजाब हमले का दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. इसके अलावा धारा 504 और 506 के तहत भी दोनों को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा दी गई है. अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. वहीं, दोषियों के भाई अंकित और मां शीला को धारा 504 और 506 के तहत दोषी पाया गया. हालांकि, उनकी उम्र और पारिवारिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने दोनों को छह महीने की परिवीक्षा पर सदाचार बनाए रखने की शर्त के साथ रिहा करने का आदेश दिया. वसूले गए कुल अर्थदंड में से 10 हजार रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे.

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By कोमल अग्रवाल

कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

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