थाईलैंड से गोरखपुर पहुंचा डेढ़ करोड़ का ‘OG गांजा’, ANTF ने पांच को दबोचा

गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन किलो प्रीमियम 'OG गांजा' बरामद किया है. इस खेप की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है, और प्रारंभिक जांच में यह थाईलैंड से भारत पहुंचने की बात सामने आई है.

UP News: गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में एएनटीएफ ने तीन किलो प्रीमियम ‘OG गांजा’ बरामद कर पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है. बरामद गांजे की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रारंभिक जांच में इसके थाईलैंड से भारत पहुंचने की जानकारी सामने आई है. अब जांच एजेंसियां सप्लायर और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं.

अर्टिगा कार से बरामद हुई गांजे की खेप

एएनटीएफ की टीम ने गुरुवार सुबह रामगढ़ताल क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को पकड़ा. तलाशी के दौरान एक अर्टिगा कार (GJ 15 AA-8841) से करीब तीन किलो ‘OG गांजा’ बरामद किया गया. इसकी अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई गई है. जांच में सामने आया है कि यह सामान्य गांजे की तुलना में महंगा और प्रीमियम उत्पाद के तौर पर बाजार में बेचा जाता है.

प्रतापगढ़ और गुजरात के रहने वाले हैं आरोपी

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सूरज सिंह, सत्यम सिंह, रत्नम त्रिवेदी, भाविन और प्रिंस पटेल के रूप में हुई है. इनमें सूरज सिंह और सत्यम सिंह प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं, जबकि रत्नम त्रिवेदी, भाविन और प्रिंस पटेल गुजरात के अलग-अलग जिलों के निवासी बताए गए हैं. सभी से पूछताछ कर इस मामले से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है.

देवरिया नंबर की गाड़ी से पहुंचा था सप्लायर

जांच के दौरान यह भी पता चला है कि आरोपितों को गांजे की खेप देने के लिए एक सप्लायर देवरिया नंबर की गाड़ी से पहुंचा था. खेप सौंपने के बाद वह मौके से निकल गया. अब पुलिस और एएनटीएफ वाहन के नंबर समेत दूसरे सुरागों के जरिए उसकी पहचान करने में जुटी है.

थाईलैंड से गोरखपुर तक पहुंची खेप की जांच

एएनटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजा थाईलैंड से भारत तक किस माध्यम से पहुंचा और देश में आने के बाद किन रास्तों से होते हुए गोरखपुर लाया गया. गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर सप्लायर, खरीदार और आगे इसकी आपूर्ति से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है. जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने में लगी हैं.

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By अंजली कश्यप

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