UP News: गोंडा में जमीन और मकान की खरीद-बिक्री आने वाले दिनों में महंगी हो सकती है. जिला प्रशासन ने सर्किल रेट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रस्तावित मूल्यांकन सूची में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की कई संपत्तियों की दरों में बदलाव किया गया है. नई दरों को 1 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी है.
सदर क्षेत्र में मकान और प्लॉट की दर बढ़ाने का प्रस्ताव
प्रस्तावित सूची के अनुसार सदर क्षेत्र में प्रथम श्रेणी के मकानों की दर 17 हजार रुपये से बढ़ाकर 19 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर करने का प्रस्ताव है. वहीं शहरी क्षेत्र में प्लॉट की दर 35 हजार से बढ़ाकर 38 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर किए जाने की तैयारी है. इसके अलावा मकानों की अलग-अलग निर्माण श्रेणियों की दरों में भी संशोधन प्रस्तावित है.
कई गांवों में करीब 10 फीसदी बढ़ोतरी की तैयारी
मनकापुर तहसील की प्रस्तावित मूल्यांकन सूची में करीब 492 गांव और टाउन एरिया के दर्जनभर मोहल्ले शामिल हैं. भिटौरा, बंदरहा, चांदपुर दुर्गा और चांदपुर माफी समेत करीब 45 गांवों में मौजूदा दरों की तुलना में लगभग 10 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव है. टाउन एरिया के सभी वार्डों में भूमि की दरें बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया है.
सड़क के हिसाब से तय होंगी जमीन की दरें
प्रस्तावित नई सूची में जमीन की दर तय करने के लिए सड़क की चौड़ाई और सड़क की श्रेणी को भी आधार बनाया गया है. राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, जनपदीय मार्ग के अलावा पक्की सड़क, खड़ंजा, आरसीसी और इंटरलॉकिंग से जुड़े गाटों के लिए अलग-अलग दरें प्रस्तावित हैं. आवासीय और व्यावसायिक भूमि की सेगमेंटवार दरों में भी बदलाव किया जा रहा है.
25 सितंबर तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
जिला प्रशासन के अनुसार प्रस्तावित सर्किल रेट को लेकर 25 सितंबर शाम पांच बजे तक संबंधित कार्यालयों में लिखित आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है. प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण 28 सितंबर को शाम चार बजे कलेक्ट्रेट सभागार में किया जाएगा. इसके बाद संशोधित मूल्यांकन सूची को 1 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी है.
बार एसोसिएशन ने बढ़ोतरी पर जताई आपत्ति
प्रस्तावित दरों में वृद्धि को लेकर बार एसोसिएशन ने भी आपत्ति दर्ज कराई है. अध्यक्ष रविचन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि सर्किल रेट बढ़ने से किसानों, खरीदारों और विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है. एसोसिएशन ने अधिकांश दरों को 2025-26 के स्तर पर बनाए रखने की मांग की है. साथ ही निर्माण श्रेणियों, पेड़ों के मूल्यांकन और रिंग रोड से प्रभावित गांवों की भूमि दरों पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है.
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