पुलिस हिरासत में पिटाई से मौत का आरोप, शव पहुंचते ही ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सड़क जाम, SI-सिपाही समेत 6 पर केस

UP Crime: बलिया में पुलिस हिरासत में ग्रामीण की मौत के आरोप से आक्रोश फैल गया. शव गांव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया. पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

UP Crime: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक ग्रामीण की मौत के आरोप ने बलिया में माहौल गर्मा दिया. वाराणसी से शव गांव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. आक्रोशित लोगों ने रेवती-बलिया मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया और दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच तथा आर्थिक सहायता की मांग की. करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर जाम समाप्त हुआ. इस मामले में ग्राम प्रधान, एक उपनिरीक्षक (SI), सिपाही समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. शव गांव पहुंचते ही फूटा गुस्सा, आधे घंटे तक जाम शनिवार देर रात वाराणसी से पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीण कामजी गोंड़ (42) का शव गांव पहुंचा तो परिजन और ग्रामीण भड़क उठे. रविवार दोपहर रेवती-बलिया मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया गया. सूचना मिलते ही एएसपी दक्षिणी संजय वर्मा, एसडीएम बांसडीह अभिषेक प्रियदर्शी, सीओ बैरिया आलोक कुमार गुप्ता, सीओ मंजरी राव सहित पांच थानों की पुलिस मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने परिजनों से वार्ता की, जिसके बाद दोपहर करीब 2:30 बजे जाम समाप्त हुआ और शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया.


शव आने के बाद जाम लगाते ग्रामीण

मुर्गा खरीदने के दौरान शुरू हुआ था विवाद

घटना की शुरुआत 7 जुलाई को खेदन चौराहे पर हुई, जहां मृतक के बेटे विशाल और सूरज कनौजिया के बीच मुर्गे का मांस खरीदने के दौरान कहासुनी और मारपीट हो गई थी. इसके बाद सूरज की ओर से थाने में शिकायत दी गई. आरोप है कि जब विशाल पूछताछ के लिए थाने नहीं पहुंचे तो अगले दिन पुलिस उनके घर पहुंची और उनकी जगह पिता कामजी गोंड़ को उठाकर थाने ले गई.

परिजनों का आरोप- पुलिस ने बेरहमी से पीटा

परिजनों का आरोप है कि थाने और अन्य स्थानों पर कामजी के साथ बुरी तरह मारपीट की गई. बाद में पुलिस उन्हें गंभीर हालत में छोड़कर चली गई. परिजन उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवती, फिर जिला अस्पताल बलिया और उसके बाद बीएचयू ट्रॉमा सेंटर, वाराणसी ले गए, जहां उपचार के दौरान 10 जुलाई की रात उनकी मौत हो गई.


मौके पर जुटी ग्रामीणों की भीड़

पत्नी और भांजी ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक की पत्नी कलावती देवी का कहना है कि पुलिस उनके पति को घर से जबरन उठाकर ले गई थी. उन्होंने पुलिस से छोड़ देने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई. आरोप है कि बाद में पुलिस गंभीर रूप से घायल हालत में उन्हें गांव के बाहर छोड़कर चली गई. वहीं, मृतक की भांजी लक्ष्मी ने भी आरोप लगाया कि पुलिस उनके मामा को थाने ले गई थी और बाद में घायल अवस्था में छोड़ दिया. उन्होंने पुलिस पर शव को कब्जे में लेने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया.

ग्राम प्रधान समेत छह लोगों पर मुकदमा दर्ज

मृतक के बेटे विशाल की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह (लालू), उनके चालक मनीष यादव, उपनिरीक्षक, सिपाही समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. आरोप है कि ग्राम प्रधान के दबाव में कामजी के साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई.

दोबारा पोस्टमार्टम और गिरफ्तारी की मांग

परिजनों का कहना है कि वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम कराने, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है.

क्या बोला प्रशासन

एसडीएम बांसडीह अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि विशाल और सूरज के बीच मारपीट के मामले में पूछताछ के लिए कामजी को थाने लाया गया था. बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा परिजनों की मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

Input: Tilak kumar



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पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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