22 हजार में संतान दिलाने का वादा, तांत्रिक ने नाबदान का पानी पिलाकर ली महिला की जान!

Azamgarh News: आजमगढ़ के पहलवानपुर गांव में संतान पाने की चाह में महिला की झाड़-फूंक के दौरान मौत हो गई. तांत्रिक ने 22 हजार रुपये लेकर इलाज का दावा किया, गला दबाया और नाबदान का पानी पिलाया. ग्रामीणों के हंगामे के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा.

Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के कंधरापुर थाना क्षेत्र स्थित पहलवानपुर गांव में झाड़-फूंक के नाम पर एक महिला की जान चली गई. मृतका अनुराधा (35) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद गांव में हड़कंप मच गया. घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने कथित तांत्रिक चंदू के घर के सामने बने मंदिर पर महिला के शव को रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. पूरी रात लोग शव के पास डटे रहे और तांत्रिक व उसके सहयोगियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे. पुलिस रातभर मौके पर तैनात रही और सुबह किसी तरह लोगों को समझा-बुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज सकी.

11 साल से संतान न होने पर लिया तंत्र-मंत्र का सहारा

अनुराधा की शादी 2014 में रंजीत यादव नामक युवक से हुई थी. 11 वर्षों तक जब उसे कोई संतान नहीं हुई, तो परिवार पर सामाजिक और मानसिक दबाव बढ़ता गया. संतान प्राप्ति की आस में अनुराधा के मायके वालों ने गांव के ही कथित तांत्रिक चंदू से संपर्क किया. चंदू ने दावा किया कि वह तंत्र-मंत्र से संतान का सुख दिला सकता है और इसके बदले उसने परिजनों से 22 हजार रुपये लिए. चंदू ने यह रकम ‘गारंटी फ़ीस’ के तौर पर ली और आश्वासन दिया कि विशेष तांत्रिक प्रक्रिया के जरिए वह महिला को गर्भवती कर देगा. यह सब अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका प्रतीक बन गया.

तांत्रिक की क्रूरता: गला दबाया, पीटा और पिलाया नाबदान का पानी

रविवार रात कथित तांत्रिक चंदू ने अपने घर पर झाड़-फूंक के नाम पर महिला पर क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं. पहले तो उसने महिला की जमकर पिटाई की, फिर उसका गला दबाया और अंत में उसे नाबदान का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर कर दिया. झाड़-फूंक की यह काली प्रक्रिया महिला के लिए जानलेवा साबित हुई. जब उसकी हालत गंभीर हुई तो चंदू उसे एक ऑटो में जिला अस्पताल लेकर गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. महिला की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और गांव में शोक और गुस्से का माहौल फैल गया.

अस्पताल से लौटकर शव को बताया ‘बेहोश’, फिर खुद थाने जाकर किया आत्मसमर्पण

चंदू महिला का शव अस्पताल से ऑटो में लेकर घर लौटा और परिजनों से कहा कि वह केवल बेहोश है, थोड़ी देर में होश में आ जाएगी. इस बयान से परिजनों को और भ्रमित कर दिया गया. इसके बाद चंदू सीधे कंधरापुर थाने पहुंचा और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया. उसने स्वीकार किया कि वह झाड़-फूंक करता है, लेकिन महिला की मौत उसके कर्मों का परिणाम नहीं है. पुलिस को शुरू में मामला संदिग्ध लगा, लेकिन जैसे-जैसे ग्रामीणों के बयान सामने आए, पूरा घटनाक्रम बेहद भयावह और चौंकाने वाला साबित हुआ.

मां काली के मंदिर के बहाने फैलाया था अंधविश्वास का जाल

ग्रामीणों के अनुसार चंदू कई वर्षों से तंत्र-मंत्र का ढोंग करता आ रहा था. उसने गांव में मां काली का एक बड़ा मंदिर भी बनवा रखा है, जहां वह तांत्रिक अनुष्ठान करता था. इतना ही नहीं, उसकी मृत बहन का मंदिर भी उसने वहीं बनवा दिया था और लोगों को यह विश्वास दिलाया था कि उसकी बहन की आत्मा विशेष शक्तियों से युक्त है. गांव और आसपास के क्षेत्रों से लोग यहां तांत्रिक क्रियाओं के लिए आते थे. चंदू ने खुद को एक सिद्ध तांत्रिक के रूप में प्रचारित किया और धीरे-धीरे उसका प्रभाव ग्रामीण समाज पर गहराता चला गया.

20 हजार से लेकर एक लाख तक में करता था ‘झाड़-फूंक का ठेका’

शुरुआत में चंदू मामूली झाड़-फूंक करता था, लेकिन जैसे-जैसे लोग उसके झांसे में आते गए, वह खुद को बड़ा तांत्रिक मानने लगा. उसने लोगों की मजबूरियों का फायदा उठाते हुए अपने झाड़-फूंक के पैकेज तय कर दिए. संतान प्राप्ति, भूत-प्रेत की बाधा, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं के नाम पर वह 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक वसूलता था. अनुराधा के परिजनों से भी उसने 22 हजार रुपये लिए थे. धीरे-धीरे उसका अंधविश्वास का व्यापार गांव में फलने-फूलने लगा और कई मासूम लोग इसका शिकार बने.

परिजनों की तहरीर पर तांत्रिक, पत्नी और दो अन्य के खिलाफ हत्या का केस

मृतका अनुराधा के परिजनों ने पुलिस में तांत्रिक चंदू, उसकी पत्नी और दो अन्य लोगों के खिलाफ हत्या की तहरीर दी है. पुलिस ने भी गंभीरता से मामले को लिया और कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कड़ी धाराएं जोड़ी जाएंगी. एसपी सिटी मधुबन सिंह ने कहा कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है. ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनज़र गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास और तांत्रिकों की अराजकता को सामने ला दिया है.

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Author: Abhishek Singh

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