UP News : इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली अभद्र भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को सरेआम गाली देने की छूट मिल जाती है. उन्होंने समाज में तेजी से कमजोर होते संस्कारों और नैतिक मूल्यों पर भी चिंता जताई.
स्वतंत्रता दिवस समारोह में दिया कड़ा संदेश
VC संगीता श्रीवास्तव ने यह बातें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कहीं. विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के माहौल और भाषा की मर्यादा पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि देश के कई शिक्षण संस्थान आज मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. कुछ अराजक तत्व संस्थानों के शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल को खराब करने की कोशिश करते हैं. ऐसे लोगों की वजह से पढ़ाई के साथ-साथ संस्थानों की गरिमा पर भी असर पड़ता है.
'अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी को गाली देना नहीं'
VC ने कहा कि हमारा संविधान सभी को अपनी बात रखने की आजादी देता है. हर नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की भी एक मर्यादा है. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को अपशब्द कहना या सार्वजनिक रूप से गाली देना उचित नहीं है. विरोध दर्ज कराने के लिए सभ्य और लोकतांत्रिक तरीके अपनाए जाने चाहिए.
पीएम मोदी और उनकी दिवंगत मां का किया जिक्र
संगीता श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली अभद्र भाषा का जिक्र करते हुए कहा कि आजकल देश के प्रधानमंत्री तक को गालियां दी जा रही हैं. उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने खास तौर पर प्रधानमंत्री की दिवंगत मां का जिक्र करते हुए कहा कि किसी की मां, खासकर ऐसी महिला जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल करना बेहद शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति से राजनीतिक या वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए.
'हमारे संस्कार और सभ्यता आखिर कहां गए?'
VC ने समाज में बदलते मूल्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत अपनी संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों के लिए जाना जाता है. ऐसे में सार्वजनिक जीवन में लगातार बढ़ती अभद्र भाषा चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर गाली-गलौज करना हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए, लेकिन दूसरे व्यक्ति के सम्मान और गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए.
'गालियां देकर कोई समाज आगे नहीं बढ़ सकता'
VC संगीता श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए संवाद, अनुशासन और आपसी सम्मान जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसी के विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन असहमति को अपशब्दों में बदल देना किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है. उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से अपील की कि वे भाषा की मर्यादा बनाए रखें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें. उनका कहना था कि गालियां देकर कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता.
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