UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान और उनके सहयोगी डॉ. नफीस की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. अदालत ने अपने कड़े रुख में स्पष्ट किया कि 'सर तन से जुदा' जैसे उकसाने वाले नारे देश की संप्रभुता, अखंडता और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं. पीठ ने जोर देकर कहा कि ऐसे हिंसक नारों की तुलना सामान्य धार्मिक जयघोषों से कदापि नहीं की जा सकती, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों को हिंसा के लिए प्रेरित करते हैं.
बिना अनुमति भीड़ जुटाने और पुलिस बल पर हमले के गंभीर आरोपों पर कड़ा रुख
न्यायालय ने प्रकरण की समीक्षा करते हुए टिप्पणी की कि आरोपी ने पुलिस व स्थानीय प्रशासन की अनुमति के बिना भारी संख्या में लोगों को एकत्र होने के लिए उकसाया था. इस आयोजन के दौरान भड़की हिंसा में पुलिसकर्मियों पर पथराव, पेट्रोल बम और फायरिंग की घटनाएं हुई थीं, जिससे कई सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे. अदालत ने कहा कि पुलिस पर हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने और दंगा फैलाने जैसे अराजक कृत्यों को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
अदालत का स्पष्ट संदेश: माहौल खराब करने वालों को नहीं मिलेगी कोई राहत
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अदालत ने माना कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने का हक सबको है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा फैलाने, शहर की शांति भंग करने और पुलिस पर हमला करने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. केस के सभी कागजातों और सबूतों को देखने के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया.
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