‘अब गवाह का बयान नहीं छिपेगा', इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य करने पर DGP को दिया ये निर्देश

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य किए जाने पर विचार करने को कहा है.

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश दिया है. कोर्ट ने यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) से गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य किए जाने पर विचार करने को कहा है. साथ ही सभी जांच अधिकारियों को मौजूदा दिशा-निर्देशों की जानकारी देने और उनका पालन सुनिश्चित कराने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

आगरा के दहेज केस की सुनवाई में उठा मामला

यह निर्देश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने आगरा से जुड़े एक दहेज मामले में चंद्रकांत की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि पहली शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करते समय उसकी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई थी. अधिकारी ने अपनी गलती के लिए कोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी.

BNSS में रिकॉर्डिंग की है व्यवस्था

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान BNSS की धारा 180(3) और BNSS के नियम 20(1) का उल्लेख किया. कोर्ट के मुताबिक, इन प्रावधानों के तहत जांच अधिकारी को गवाह के बयान को ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्ड करने की अनुमति है. यानी पुलिस के पास जांच के दौरान इस तकनीक का इस्तेमाल करने का कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद है.

DGP के सर्कुलर का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने DGP की ओर से जारी 21 जुलाई 2025 और 4 अगस्त 2026 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों के बावजूद उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें जांच अधिकारियों ने गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की. रेप पीड़िता के बयान के संबंध में DGP के सर्कुलर नंबर 24/2025 में रिकॉर्डिंग को अनिवार्य किए जाने की बात भी कोर्ट ने बताई.

रिकॉर्डिंग के विकल्प के गलत इस्तेमाल पर चिंता

कोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 180 के तहत सामान्य गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग फिलहाल वैकल्पिक है. अदालत के सामने यह बात आई कि कुछ जांच अधिकारी इस विकल्प का इस्तेमाल रिकॉर्डिंग से बचने के लिए करते हैं. कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि इससे बाद में यह सवाल उठ सकता है कि गवाह का बयान वास्तव में उसने खुद दिया था या जांच अधिकारी ने अपनी तरफ से उसे दर्ज किया.

सभी बयानों की रिकॉर्डिंग पर विचार करने को कहा

हाईकोर्ट ने DGP को निर्देश दिया कि सभी गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने की संभावना पर विचार किया जाए. साथ ही सभी जांच अधिकारियों को संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों की जानकारी देकर उनके पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं. अदालत ने कहा कि जांच का उद्देश्य वास्तविक आरोपी तक पहुंचना और निर्दोष लोगों को गलत जांच के कारण परेशानी से बचाना होना चाहिए.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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