चार लोगों को थाने में रखा, फिर गायब हो गई CCTV! पुलिस का जवाब सुन HC का चढ़ा पारा ऐसी लगाई फटकार , बोला- ‘झूठों का झुंड’

UP News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी की है. थाने की CCTV फुटेज पेश न होने पर कोर्ट ने पुलिस को 'झूठों का झुंड' तक कह दिया और 65 हजार रुपये मुआवजे का आदेश दिया.

UP News: देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. थाने की CCTV फुटेज पेश नहीं होने पर कोर्ट ने पुलिस से सवाल किए. पुलिस की सफाई पर भी अदालत संतुष्ट नहीं हुई. सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने चारों याचियों को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. यह रकम थानाध्यक्ष के वेतन से वसूल की जाएगी.

चार लोगों को हिरासत में रखने का आरोप

मामला महेंद्र गौड़ की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है. न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. याचिका में आरोप लगाया गया कि चार लोगों को 13 से 24 अप्रैल के बीच गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया. इनमें कुछ लोगों को करीब 10 दिन तक थाने में रखा गया था. अन्य की हिरासत इससे कम अवधि की थी.

CCTV फुटेज नहीं मिली तो कोर्ट ने पूछा सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने थाने की CCTV फुटेज के बारे में जानकारी मांगी. पुलिस की ओर से फुटेज उपलब्ध नहीं कराए जाने पर कोर्ट ने सवाल उठाया. थाना प्रभारी की ओर से CCTV सिस्टम खराब होने की बात बताई गई. पुलिस की दलील और रिकॉर्ड को लेकर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने पुलिस की सफाई को भरोसेमंद नहीं माना. यही वजह रही कि सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यशैली पर कोर्ट की नाराजगी खुलकर सामने आई. खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी में पुलिस अधिकारियों को ‘झूठों का झुंड’ तक कह दिया.

थाने में CCTV को लेकर कोर्ट सख्त

हाई कोर्ट ने थानों में CCTV व्यवस्था को लेकर भी गंभीरता दिखाई. अदालत ने स्पष्ट किया कि थाने में CCTV कैमरों की व्यवस्था केवल दिखावे के लिए नहीं हो सकती. पुलिस को CCTV कैमरों को चालू रखने के साथ उनकी फुटेज का बैकअप भी सुरक्षित रखना होता है. ऐसे में फुटेज उपलब्ध नहीं होने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया.

चार याचियों को 65 हजार रुपये मुआवजा

कोर्ट ने चारों याचियों को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. अर्चना गौड़, नंदिनी गौड़ और इन्नी को 20-20 हजार रुपये दिए जाएंगे. वहीं, महेंद्र गौड़ को 5 हजार रुपये मुआवजा मिलेगा. अदालत ने साफ किया कि मुआवजे की रकम थानाध्यक्ष के वेतन से वसूल की जाएगी.

अवैध हिरासत पर पहले भी सख्त हो चुका है हाई कोर्ट

अवैध हिरासत के मामलों में इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले भी सख्त रुख अपना चुका है. जून में कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक अवैध रूप से हिरासत में रखने पर 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा. यह राशि दोषी पाए गए मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी. यह आदेश गाजियाबाद निवासी चंद्रपाल पाल सिंह और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया था. कोर्ट ने डीजीपी को सभी जिला पुलिस प्रमुखों को इस संबंध में परिपत्र जारी करने का निर्देश भी दिया था.

Also Read: पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर आयोजित होगी भव्य जनसभा, किसान रैली से पश्चिमी यूपी साधेगा भाजपा-रालोद गठबंधन

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By खुशी सिंह

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >