खत्म हो गया था गोला-बारूद, फिर भी नहीं मानी हार,पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले वीर चक्र विजेता अल्फ्रेड कुक का निधन

1965 भारत-पाक युद्ध के वीर चक्र विजेता फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड कुक का निधन हो गया. 87 वर्षीय कुक ने गोला-बारूद खत्म होने पर भी दुश्मनों का सामना किया था.

Lucknow News : भारतीय वायु सेना के पूर्व फाइटर पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड टायरोन कुक का नई दिल्ली के बेस अस्पताल में निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे. कुक को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अदम्य साहस के लिए ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था. उनका लखनऊ से भी गहरा नाता रहा और वह ला मार्टिनियर कॉलेज के पूर्व छात्र थे.

1965 की जंग में दिखाया था अदम्य साहस

अल्फ्रेड टायरोन कुक ने 7 सितंबर 1965 को पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरफील्ड पर हुई कार्रवाई के दौरान साहस का परिचय दिया था. पाकिस्तानी सेबर विमानों ने एयरफील्ड पर हमला किया था. उस समय कुक दो भारतीय विमानों वाले कॉम्बैट एयर पेट्रोल का नेतृत्व कर रहे थे. हमलावर विमानों को रोकने के लिए कुक आगे बढ़े. इसी दौरान भारतीय एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से भी फायरिंग शुरू हो गई. कुक ने एक पाकिस्तानी सेबर विमान को मार गिराया और दूसरे विमान का पीछा किया.

गोला-बारूद खत्म हुआ, फिर भी जारी रखा मुकाबला

कुक की वीरता का सबसे खास पहलू यह था कि दूसरे पाकिस्तानी विमान का पीछा करते समय उनके विमान का गोला-बारूद खत्म हो चुका था. इसके बावजूद उन्होंने लड़ाई जारी रखी और पाकिस्तानी विमानों के पीछे हटने तक उनका मुकाबला करते रहे. उन्हें दिए गए ‘वीर चक्र’ के प्रशस्ति-पत्र में उनके साहस, नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति समर्पण की सराहना की गई थी.

1950 से 1958 तक लखनऊ में की पढ़ाई

अल्फ्रेड टायरोन कुक का लखनऊ से पुराना रिश्ता था. उन्होंने 1950 से 1958 तक ला मार्टिनियर कॉलेज में पढ़ाई की थी. वह कॉलेज के ल्योन हाउस में बोर्डर के तौर पर करीब आठ साल रहे.पढ़ाई पूरी करने के कुछ साल बाद वह भारतीय वायु सेना में शामिल हुए. साल 1961 में उन्होंने वायु सेना में सेवा शुरू की और कलाईकुंडा स्थित नंबर 14 स्क्वाड्रन के साथ हॉकर हंटर फाइटर विमान उड़ाया.

सात साल तक भारतीय वायु सेना में दी सेवा

कुक ने करीब सात साल तक भारतीय वायु सेना में सेवा दी. इसके बाद 1968 में उन्होंने वायु सेना छोड़ दी और ऑस्ट्रेलिया में बस गए. उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं. बताया गया है कि कुक अंबाला में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत आए थे. इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें नई दिल्ली के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार को उनका निधन हो गया.

2015 में कॉलेज ने किया था सम्मानित

1965 के युद्ध के 50 वर्ष पूरे होने पर 2015 में ला मार्टिनियर कॉलेज ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था. इसमें अल्फ्रेड कुक समेत सशस्त्र बलों में सेवा देने वाले कॉलेज के पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया था. उसी साल कुक नंबर 14 स्क्वाड्रन में भी लौटे थे और अपना ‘वीर चक्र’ उस यूनिट को भेंट किया था.

सम्मान में आधा झुका कॉलेज का झंडा

अल्फ्रेड टायरोन कुक के निधन की खबर के बाद ला मार्टिनियर कॉलेज ने सम्मान के तौर पर अपना झंडा आधा झुका दिया. कॉलेज से जुड़े लोगों के बीच उनके निधन पर शोक की लहर है.उनकी अंतिम विदाई बुधवार को परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में किए जाने की जानकारी दी गई है.

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By रवि रंजन कुमार

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