आपके पास भी आता है फर्जी कॉल तो हो जाएं सावधान, आगरा में साइबर ठग ने ऐसे उड़ा लिए 91,500 रुपये

साइबर ठगों ने अब पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराना और ठगी करना शुरू कर दिया है. आगरा में एक युवक को लखनऊ पुलिस का अधिकारी बताकर ₹91,500 की ठगी की गई. जानिए यह पूरा मामला और बचने के उपाय.

UP Crime news : साइबर अपराधी अब पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराने और ठगी करने का नया तरीका अपना रहे हैं. आगरा के शाहगंज क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यहां साइबर अपराधी ने खुद को लखनऊ पुलिस का अधिकारी बताकर युवक को फोन किया और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही. गिरफ्तारी और केस में नाम आने का डर दिखाकर नाम हटाने के नाम पर युवक से 91,500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए. रकम अलग-अलग यूपीआई आईडी पर भेजने के बाद आरोपी ने बातचीत बंद कर दी. इसके बाद परिवार को ठगी का एहसास हुआ. पीड़ित की मां ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

मैं लखनऊ पुलिस से बोल रहा हूं... कहकर डराया

शाहगंज के जीआर एस्टेट मुरली विहार निवासी एकता अग्रवाल ने बताया कि 29 अक्तूबर 2025 को एक अज्ञात व्यक्ति ने उनके बेटे शिखर अग्रवाल को फोन किया. कॉल करने वाले ने खुद को लखनऊ पुलिस का अधिकारी बताया. आरोपी ने शिखर से कहा कि उसका नाम एक अपराध के मामले में सामने आया है और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है. इसके बाद केस से नाम हटाने और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर रुपये की मांग की गई.

अलग-अलग UPI ID पर भेजे 91,500 रुपये

आरोपी की बातों में आकर शिखर ने यूपीआई के जरिए कई बार में कुल 91,500 रुपये ट्रांसफर कर दिए. ठगों ने रकम एक ही खाते में लेने के बजाय अलग-अलग यूपीआई आईडी पर मंगवाई. रुपये मिलने के बाद आरोपी ने बातचीत बंद कर दी. इसके बाद परिवार को शक हुआ और जांच करने पर पता चला कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं.

ठगों ने अलग-अलग नाम बताकर बनाया भरोसा

पीड़ित परिवार के अनुसार, फोन करने वाले ने अपना नाम साहिल बताया. बातचीत के दौरान उसने अन्य लोगों के नाम भी बताए, जिनमें मनोज सिंह, अतुल कुमार पांडेय और संदीप कुमार शामिल थे. ठगी का पता चलने के बाद एकता अग्रवाल ने साइबर क्राइम थाने में तहरीर दी. बृहस्पतिवार देर रात मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई.

पुलिस ने कहा- केस से नाम हटाने के लिए कोई रुपये नहीं मांगता

डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने लोगों को ऐसे फोन कॉल से सावधान रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर केस में नाम हटाने या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर रुपये मांगता है, तो किसी भी स्थिति में भुगतान न करें. पुलिस या किसी सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी इस तरह फोन पर पैसे मांगकर कानूनी कार्रवाई रोकने का दावा नहीं करता. ऐसे मामलों में घबराने के बजाय संबंधित थाने से संपर्क करना चाहिए.

साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

पुलिस के नाम पर आए कॉल पर तुरंत भरोसा न करें. केस में नाम हटाने या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर कोई रकम मांगे तो पैसे ट्रांसफर न करें. UPI से भुगतान करने से पहले पहचान जांचें. किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध UPI ID पर पैसे भेजने से बचें. संदिग्ध कॉल की सूचना पुलिस को दें. ऐसे किसी भी फोन कॉल की जानकारी अपने नजदीकी थाने या साइबर अपराध हेल्पलाइन को दें. ठगी होने पर तुरंत कार्रवाई करें. बैंक को तत्काल सूचना दें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं. जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है. पुलिस अधिकारी बनकर फोन करना, डराना और केस से नाम हटाने के बदले पैसे मांगना साइबर ठगी का तरीका हो सकता है. ऐसे कॉल पर घबराने के बजाय पहले संबंधित पुलिस थाने से सत्यापन करें.

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By रवि रंजन कुमार

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