UP के 9 नेता जो कभी चुनाव नहीं हारे, किसी ने 9 तो किसी ने 11 बार जीता चुनाव; देखें पूरी List

योगी, मोदी, अखिलेश से लेकर राजा भैया तक… UP के 9 नेता जिनके नाम कभी नहीं जुड़ी चुनावी हार.

उत्तर प्रदेश की सियासत में कई बड़े नाम आए और गए, लेकिन कुछ नेताओं के चुनावी रिकॉर्ड आज भी चौंकाते हैं.

किसी ने लगातार कई बार एक ही सीट जीती, तो किसी ने अलग-अलग राज्यों और सीटों से चुनाव लड़कर हर बार जीत दर्ज की.

लेकिन सवाल है-

इस लिस्ट में नंबर-1 कौन है?

#9 वरुण गांधी

3 चुनाव, 3 जीत

varun-gandhi

बेबाक बयानों के लिए चर्चित वरुण गांधी ने 2009 में पीलीभीत से लोकसभा चुनाव जीतकर सियासी सफर शुरू किया.

उन्होंने 2009 में 2,81,501 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. इसके बाद 2014 में सुल्तानपुर और 2019 में पीलीभीत से भी जीत हासिल की. यानी लोकसभा के तीनों चुनावों में जीत.

2024 में उन्हें BJP ने टिकट नहीं दिया, लेकिन चुनावी मैदान में उनका रिकॉर्ड अब तक 3-0 रहा है.

#8 अनुप्रिया पटेल

4 चुनाव, 4 जीत

अनुप्रिया पटेल ने 2012 में वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से पहली चुनावी जीत दर्ज की.

2014 में उन्होंने मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव जीता और इसके बाद 2019 और 2024 में भी मिर्जापुर से जीत दोहराई.

यानी-

2012 विधानसभा + 2014, 2019, 2024 लोकसभा

4 चुनाव, 4 जीत!

यह रिकॉर्ड उन्हें UP की राजनीति के बेहद सफल युवा चेहरों में शामिल करता है.

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#7 राजीव गांधी

अमेठी से लगातार जीत

राजीव गांधी

राजीव गांधी ने 1981 में अमेठी लोकसभा सीट के उपचुनाव से चुनावी राजनीति में प्रवेश किया.

उन्होंने उस उपचुनाव के बाद 1984, 1989 और 1991 में भी अमेठी से जीत दर्ज की.

यानी कुल 4 चुनाव, 4 जीत.

1981 में उन्होंने अमेठी उपचुनाव दो लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीता था और 1991 तक सीट अपने पास रखी.

1991 के आम चुनावों के दौरान, 20 मई को कांग्रेस पार्टी के राजीव गांधी और भाजपा के रविंद्र प्रताप सिंह के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. दुर्भाग्यवश, 21 मई को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी रैली के दौरान राजीव गांधी आत्मघाती हमलावर के हमले का शिकार हो गए. राजीव गांधी की जीत का अंतर 1,12,085 वोटों का रहा.

#6 अखिलेश यादव

कन्नौज से आजमगढ़ और करहल तक- हार नहीं!

अखिलेश यादव (फोटो-सोशल मीडिया)

अखिलेश यादव का चुनावी रिकॉर्ड थोड़ा अलग है, क्योंकि उन्होंने कई बार एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा.

2000 में कन्नौज उपचुनाव से शुरुआत के बाद उन्होंने 2004 और 2009 में कन्नौज से जीत दर्ज की.

2009 में उन्होंने फिरोजाबाद से भी चुनाव जीता.

2019 में आजमगढ़ और 2022 में करहल से भी जीत हासिल की. इसके बाद 2024 में कन्नौज से फिर लोकसभा पहुंचे.

इस तरह उनके खाते में 8 चुनावी मुकाबले और 8 जीत दर्ज होती हैं, अगर दोनों 2009 लोकसभा सीटों को अलग-अलग contest माना जाए.

यानी रिकॉर्ड: 8-0

#5 योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर से Lucknow तक मजबूत चुनावी रिकॉर्ड

CM योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ 26 साल की उम्र में 1998 में गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीता.

इसके बाद-

1999 → 2004 → 2009 → 2014

लगातार पांच लोकसभा चुनाव जीते.

2022 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और गोरखपुर शहरी सीट से 1.65 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर जीत दर्ज की.

6 चुनाव, 6 जीत!

यानी जिस मैदान में उतरे, वहां अब तक हार नहीं मिली.

#4 राजा भैया

कुंडा में तीन दशक का दबदबा

रघुराज प्रताप सिंह यानी राजा भैया ने 1993 में कुंडा विधानसभा सीट से अपना चुनावी सफर शुरू किया.

इसके बाद-

1996 → 2002 → 2007 → 2012 → 2017 → 2022

हर बार जीत दर्ज की.

2022 में उन्होंने कुंडा से लगातार सातवीं जीत हासिल की.

खास बात यह कि शुरुआती कई चुनावों में वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे.

कुंडा में रिकॉर्ड: 7-0

यानी करीब तीन दशक से कुंडा की राजनीति में उनका दबदबा कायम है.

#3 सोनिया गांधी

6 नहीं, चुनावी मुकाबलों की गिनती और भी दिलचस्प

सोनिया गांधी, फोटो एक्स

सोनिया गांधी ने 1999 में अमेठी और बेल्लारी- दोनों सीटों से चुनाव जीता.

इसके बाद रायबरेली उनका राजनीतिक गढ़ बन गया.

2004, 2006 के उपचुनाव, 2009, 2014 और 2019- हर बार उन्होंने जीत दर्ज की.

इस हिसाब से अगर अलग-अलग सीटों के contests को गिना जाए तो उनके खाते में 7 चुनावी मुकाबले और 7 जीत आती हैं.

रिकॉर्ड: 7-0

2019 के बाद उन्होंने लोकसभा की जगह राज्यसभा का रुख किया.

#2 नरेंद्र मोदी

गुजरात से वाराणसी तक- हर चुनाव में जीत

पीएम नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी का electoral record भी बेहद खास है.

2002 में राजकोट-II उपचुनाव जीतने के बाद उसी साल मणिनगर से विधानसभा चुनाव जीता.

फिर-

2007 → मणिनगर 2012 → मणिनगर 2014 → वडोदरा + वाराणसी 2019 → वाराणसी 2024 → वाराणसी

इन सभी मुकाबलों में उन्होंने जीत दर्ज की.

अगर हर constituency contest को अलग चुनावी मुकाबला माना जाए तो रिकॉर्ड 8-0 बैठता है.

2002 से अब तक, कोई चुनावी हार नहीं!

#1 चौधरी चरण सिंह

11 चुनाव, 11 जीत?

अब आता है सबसे बड़ा नाम.

चौधरी चरण सिंह ने 1937 में संयुक्त प्रांत की विधानसभा से चुनावी राजनीति शुरू की और 1937 से 1974 तक लगातार 8 बार उस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. उनके आधिकारिक archive में 1937, 1946, 1952, 1957, 1962, 1967, 1969 और 1974 का उल्लेख मिलता है.

इसके बाद 1977, 1980 और 1984 में बागपत से लोकसभा चुनाव जीते.

इस तरह 1937 से 1984 तक कुल 11 चुनावी जीत गिनने पर उनका रिकॉर्ड 11-0 बनता है. हालांकि कुछ चुनावी इतिहास केवल स्वतंत्र भारत के चुनावों को गिनते हैं और इसलिए उनकी संख्या 9 बताते हैं.

यानी counting के तरीके पर फर्क हो सकता है, लेकिन एक बात साफ है- चरण सिंह का चुनावी सफर असाधारण रूप से सफल रहा।

आखिर इन नेताओं का रिकॉर्ड इतना खास क्यों?

इन सभी नेताओं की कहानी एक जैसी नहीं है.

किसी ने एक ही सीट को अपना गढ़ बनाया…

किसी ने अलग-अलग राज्यों और सीटों से जीत दर्ज की…

किसी ने पार्टी के मजबूत संगठन के सहारे जीत हासिल की…

तो किसी ने व्यक्तिगत जनाधार के दम पर.

लेकिन एक बात common है-

चुनाव दर चुनाव जीतने की क्षमता.

और यही इन नेताओं को उत्तर प्रदेश की सियासत के सबसे दिलचस्प 'undefeated electoral records' में शामिल करती है.

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, Geopolitical Analyst, UPSC Educator और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं (जैसे Pratiyogita Darpan) में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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