प्राण-प्रतिष्ठा से पहले उमा भारती ने राम जन्मभूमि आंदोलन को किया याद, कहा- इन्हें मिलना चाहिए श्रेय

उमा भारती ने मंदिर के मुद्दे पर कार सेवकों को एकजुट करने और आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के दिवंगत पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के प्रयासों को याद करते हुए कहा, दूसरा श्रेय अशोक सिंघल को जाना चाहिए, जिन्होंने आंदोलन को अगले स्तर पर पहुंचाया.

अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. इसके लिए भव्य समारोह का अयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर के कई दिग्गज और प्रतिष्ठित लोग शामिल होंगे. राम मंदिर को लेकर राजनीति भी हो रही है. विपक्ष ने बीजेपी, आरएएस और वीहीप पर श्रेय लेने का आरोप लगाया है. कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को राजनीतिक समारोह बनाने का भी आरोप लगाया है. इस बीच प्राण-प्रतिष्ठा से पहले बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने राम जन्मभूमि आंदोलन को याद किया है और बताया कि इसका पूरा श्रेय किसे दिया जाना चाहिए.

उमा भारती ने बताया राम मंदिर निर्माण का श्रेय किसे दिया जाना चाहिए

राम जन्मभूमि आंदोलन में अग्रणी नेताओं में शामिल उमा भारती ने प्राण-प्रतिष्ठा से पहले उस दौर को याद किया, जिसमें कई लोगों राम मंदिर के लिए अपने प्राण की आहुति दे दी. मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भगवा नेता ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन ‘500 वर्षों’ से अधिक का संघर्ष था और इसकी सफलता के लिए किसी एक व्यक्ति को श्रेय नहीं मिलना चाहिए. उमा भारती ने कहा, यह आंदोलन पांच शताब्दियों तक चला. यह देश का एकमात्र ऐसा आंदोलन था, जो 500 वर्षों तक आगे बढ़ाया गया और सफल रहा. मुझे लगता है कि श्रेय पहले और सबसे पहले उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने (बाबरी) मस्जिद को गिराया. यदि ढांचा नहीं गिराया गया होता तो कोई सर्वेक्षण संभव नहीं होता. सर्वेक्षण हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने इसके निष्कर्षों को स्वीकार कर लिया.

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उमा भारती ने राम मंदिर निर्माण के लिए दूसरा श्रेय अशोक सिंघल को दिया

न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में उमा भारती ने मंदिर के मुद्दे पर कार सेवकों को एकजुट करने और आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के दिवंगत पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के प्रयासों को याद करते हुए कहा, दूसरा श्रेय अशोक सिंघल को जाना चाहिए, जिन्होंने आंदोलन को अगले स्तर पर पहुंचाया. उनके नेतृत्व और उनके दृष्टिकोण था कि हम राम जन्मभूमि आंदोलन में कूद पड़े. उन्होंने आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इसका श्रेय दिया और कहा, आंदोलन को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ को भी है. आखिर में उमा भारती ने कहा, हालाकि, जैसा कि मैंने कहा, अधिकांश श्रेय उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने इस उद्देश्य के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

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करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

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एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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