Manish Gupta Death Case: मृतक व्यवसायी मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता के लिए कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में ओएसडी पद का गठन किया जाएगा. इसके बाद उन्हें इस पद पर प्रतिनियुक्त किया जाएगा. 28 सितंबर को गोरखपुर के एक होटल में छापेमारी के दौरान मनीष गुप्ता की मौत हो गई थी.
मृतक व्यवसायी मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता ने कहा, सीएम ने मुझे आश्वासन दिया है, उन्होंने खुद मामले को कानपुर स्थानांतरित करने और नई टीम बनाकर यहां इसकी जांच करने की बात कही है. दूसरे पैनल के माध्यम से हो पोस्टमॉर्टम और एफआईआर दर्ज हो.
मीनाक्षी गुप्ता ने कहा, उन्होंने मेरी सरकारी नौकरी की मांग स्वीकार कर ली और मेरे बेटे के भविष्य के लिए भी कुछ पैसे देंगे. उन्होंने मुझे सीबीआई जांच के लिए एक आवेदन लिखने के लिए कहा है. मुझे खुशी है कि उन्होंने मेरे परिवार के लिए एक बड़े अभिभावक के रूप में काम किया.
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वहीं, व्यवसायी मनीष गुप्ता की मौत पर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा, हमें सूचना मिली कि 27 सितंबर की रात एक होटल में चेकिंग की गई. एक कमरे में 3 लोग थे, जिनमें से 2 के पास पहचान पत्र थे जबकि तीसरे के पास शायद नहीं था. उसने भागने की कोशिश की, गिर गया और घायल हो गया. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा, डॉक्टरों के एक पैनल ने तुरंत उसका पोस्टमॉर्टम किया. मामले में 6 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. जब उनका परिवार वहां पहुंचा, तो मृतक की पत्नी ने शिकायत दर्ज की, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और सरकार से मुआवजे की भी घोषणा की गई.
एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया, आज मनीष गुप्ता के शव का अंतिम संस्कार किया गया. दोषियों को बख्शा न जाएगा. संबंधित एडीजी-डीआईजी रेंज के अधिकारी इसकी जांच करें. 2 समितियां, जो पहले बनी थीं, उन लोगों की पहचान करेंगी जो दागी हैं और जिनके खिलाफ ऐसी शिकायतें हैं. निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं.
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गोरखपुर के एक होटल में छापे के दौरान व्यापारी की मौत पर कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है. सीएम ने 6 निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. हम उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.
कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, यूपी में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. चाहे वह पुलिसकर्मी हो या उच्च पदों पर बैठा अन्य व्यक्ति. मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाया जाएगा. पीड़ित परिवार के साथ सरकार खड़ी है. हम उनकी मांगों को सुनेंगे.
Posted By: Achyut Kumar
