मनीष हत्याकांड: सीबीआई की विशेष कोर्ट ने तय किए आरोप, केवल तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक पर चलेगा हत्या का मुकदमा

मनीष हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश ने प्रार्थना पत्र को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन निरीक्षक जगत नारायण सिंह के विरुद्ध हत्या कर साक्ष्य मिटाने और अन्य आरोपितों के विरुद्ध इसी उद्देश्य से मारपीट करने एवं साक्ष्य मिटाने का आरोप तय किया है.

Gorakhpur: प्रदेश के चर्चित मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में गोरखपुर के रामगढ़ताल थाना के तत्कालीन प्रभारी जगत नारायण सिंह पर हत्या के आरोप में ट्रायल होगा. जबकि आरोपी बनाए गए अक्षय मिश्रा समेत अन्य पांच पुलिसकर्मियों को साक्ष्य मिटाने, मारपीट करने, धमकी देने का आरोपी माना गया है.सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार झा ने सभी अभियुक्तों के आरोप तय किए हैं.

पुलिसकर्मी नियमों के मुताबिक नहीं पहुंचे थे होटल

गोरखपुर के रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस में हुए मनीष हत्या के मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों की ओर से सीबीआई न्यायालय में उन्मोचन प्रार्थना पत्र को विशेष न्यायाधीश विजय कुमार झा ने निरस्त कर दिया है. न्यायालय ने होटल कृष्णा पैलेस में पुलिस वालों के इकट्ठा होने को नियमों के अनुकूल नहीं माना है. आरोपित पुलिस वालों ने विवेचना में यह तथ्य सामने लाया था कि घटना के दिन तत्कालिक पुलिस कप्तान द्वारा होटल की चेकिंग करने का निर्देश दिया गया था जिस क्रम में पुलिस चेकिंग करने होटल गई थी.

ये आरोप किए गए तय

विशेष न्यायाधीश ने प्रार्थना पत्र को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन निरीक्षक जगत नारायण सिंह के विरुद्ध हत्या कर साक्ष्य मिटाने और अन्य आरोपितों के विरुद्ध इसी उद्देश्य से मारपीट करने एवं साक्ष्य मिटाने का आरोप तय किया है.

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सितंबर 2021 का है मामला

बताते चलें 27 सितंबर 2021 को कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता अपने दो दोस्तों के साथ गोरखपुर आए थे. गोरखपुर का रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के तारामंडल स्थित एक होटल में वह रुके थे. होटल में रात को जांच करने पहुंची पुलिस कर्मियों ने मनीष व उनके दोस्तों की पिटाई कर दी थी, जिसकी वजह से मनीष की मृत्यु हो गई थी.

पत्नी की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा

इस प्रकरण में मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर रामगढ़ताल थाने में थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह, एसआई अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत हुआ था, जिसके बाद इसकी विवेचना कानपुर एसआईटी ने की. एक माह बाद यह जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.

रिपोर्ट– कुमार प्रदीप, गोरखपुर

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