लखनऊ:उत्तर प्रदेश के बागपत में रहनेवाले दर्जी की लड़की ने पहले ही प्रयास में देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा आइएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है. आइएएस रैंकिंग में शना अख्तर का स्थान 186वां है. शना ने 10वीं व 12वीं में भी जनपद टॉप कर अपनी मेधा का परिचय दिया था. शना के पिता शमीम अख्तर पेशे से दर्जी हैं, लेकिन सोच व जज्बे से प्रगतिवादी हैं. छोटी कमाई में परिवार में ऐसा शैक्षिक माहौल बनाया कि आइएएस बेटी शना ही नहीं, उनका पूरा परिवार पिता पर नाज करता रहा है.
मार्च 2012 से शुरू की तैयारी : एनआइइटी नोएडा से बीटेक करने के बाद शना ने नौकरी की, लेकिन पहले से ही आइएएस बनने का सपना पाले शना ने नौकरी एक साल के बाद छोड़ कर सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गयी. उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी विधिवत मार्च 2012 से शुरू की. उन्हें दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में सिविल सर्विस की मुफ्त कोचिंग मिली. एंथ्रोपोलॉजी से उन्होंने तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा की यह परीक्षा फतह कर ली. चार भाई-बहनोंवाली शना की शादीसुदा बड़ी बहन उत्तराखंड के भीमपाल यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं. बड़ा भाई एमबीए करने के बाद नौकरी कर रहा है, जबकि सबसे छोटा भाई इसलामिक शिक्षा ग्रहण कर रहा है.
दर्जी की बेटी ने यूपीएससी परीक्षा में पायी सफलता
लखनऊ:उत्तर प्रदेश के बागपत में रहनेवाले दर्जी की लड़की ने पहले ही प्रयास में देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा आइएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है. आइएएस रैंकिंग में शना अख्तर का स्थान 186वां है. शना ने 10वीं व 12वीं में भी जनपद टॉप कर अपनी मेधा का परिचय दिया था. शना के पिता शमीम अख्तर […]
