।।राजेन्द्र कुमार।।
लखनऊ:सूबे की खराब कानून व्यवस्था को लेकर देशभर में उत्तर प्रदेश की फजीहत हुई, तब जाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यूपी की कानून व्यवस्था को चाकचौबंद करने का होश आया. और मंगलवार को मुख्यमंत्री ने सूबे के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारी तथा पुलिस कप्तानों को बुलाकर उन्हें कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नेताओं के दबाव में मुक्त होकर कार्य करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी आरोपी को नेताओं के दबाव में ना छोडा जाए और ना ही पकड़ा जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार यूपी में अधिकारियों के कामकाज का मूल्यांकन अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के आधार पर किया जाएगा. इसलिए कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कोई भी अधिकारी नेताओं की दखलअंदाजी को बर्दास्त ना करे और पूरी निष्ठा के साथ हर अधिकारी काम करे. बेइमानी से बचे.
यहां सचिवालय के तिलक हाल में सूबे के हर जिले से पहुंचे अफसरों के बीच में मुख्यमंत्री नेबदायूं में हुए रेप कांड और दादरी में भाजपा नेता की हत्या का जिक्र भी किया. मुख्यमंत्री ने कहा है कि अपराधी सिर्फ अपराधी होता है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. इसके लिए किसी के आदेश का इंतजार ना किया जाए. मौके पर ही निर्णय लेते हुए अपराधी के खिलाफ कार्रवाई हो. यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने कई जिलों की खराब कानून व्यवस्था का जिक्र किया और उन जिलों के जिलाधिकारी और पुसिल अधीक्षक को फटकार भी लगाई. फिर उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यूपी में बदायूं जैसी घटना दोहराई ना जाए. कानून-व्यवस्था और विकास ही अधिकारियों की प्राथमिकता रहे. मुख्यमंत्री ने अफसरों को सरकार की सोच बताते हुए यह दावा किया कि मेहनती एवं ईमानदार अधिकारियों को पूरा संरक्षण सरकार के स्तर से प्रदान किया जाएगा और लापरवाह एवं भ्रष्ट अधिकारियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अधिकारी नेताओं के जरिए अपनी पैरवी कराने से बचे, ऐसा करने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी सोच भी अफसरों के बीच रखी और कहा कि जिलों में प्रशासन और पुलिस से जिस तरह के काम की अपेक्षा है, वह नहीं हो पा रहा है. ऐसा क्यों है? इसे लेकर मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद कई अफसरों के विचार भी जाने. फिर मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे की कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है. अब इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पुलिस को हर घटना में मौके पर पहुंचना होगा. यदि किसी सूचना पर पुलिस मौके पर नहीं पहुंची तो फिर लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी. पुलिस को बड़े से बड़े अपराधी पर हाथ डालना ही होगा. अब अपराधी की जगह जेल में होगी. पुलिस को भी सख्त होना होगा. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जतायी कि उनके इन निर्देशों के बाद दोषी व्यक्ति के विरूद्ध अब मौके पर कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री के इस संबोधन के बाद सूबे के मुख्य सचिव ने जिलों से आए प्रशासनकि और पुसिल के अफसरों की तरफ से कहा कि उनके निर्देशों के अनुसार अधिकारी कार्य करके यूपी की छवि को निखारेंगे.
विपक्ष ने मुख्यमंत्री की बैठक को छलवा बताया
सूबे की कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई प्रदेश भर के अफसरों की बैठक को भाजपा और कांग्रेस ने छलावा बताया है. भाजपा प्रवक्ता विजय पाठक के अनुसार अखिलेश सरकार की नीति और नियत ठीक हुए बगैर ना तो यूपी कानून व्यवस्था ठीक हो सकती है और ना ही राज्य के विकास को पटरी पर लाया जा सकता है. इससे बेहतर था कि मुख्यमंत्री अपने पार्टी संगठन की समीक्षा बैठक कर कार्यकर्ताओं को सुधारने के लिए कहते तो बेहतर परिणाम की आशा हो सकती थी. क्योंकि राज्य की कानून व्यवस्था के लिए सर्वाधिक चुनौती सपा कार्यकर्ता ही है. कांग्रेस प्रवक्ता सुरेद्र राजपूत ने भी मुख्यमंत्री की बैठक पर सवाल खड़े किए और कहा कि पूरी तौर पर भ्रमित अखिलेश सरकार कानून व्यवस्था के मोर्चे पर जैसे ही ठीक होने और सख्ती का संदेश देने की कोशिश करती है, वैसे ही अराजक तत्व सरकार को चुनौती देते है. इन चुनौती देते तत्वों को सत्तारूढ़ दल के नेताओं का संरक्षण होता है. इसलिए बेहतर हो कि मुख्यमंत्री सरकार के लिए संकट बनने वाले सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करें. ताकि प्रदेश और सपा दोनों का ही भला हो सके.
