Jharsuguda News: लैयकरा ब्लॉक क्षेत्र में दिखे बाघ के पंजे के निशान, वन विभाग की टीम जांच में जुटी

Jharsuguda News: झारसुगुड़ा जिले के लैयकरा ब्लॉक में एक बाघ के पंजे के निशान पाये गये हैं. वन विभाग की टीम मामले की जांच में जुटी है.

Jharsuguda News: झारसुगुड़ा जिले के लैयकरा ब्लॉक क्षेत्र में सोमवार की सुबह बाघ के पंजे के निशान देखे जाने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी मच गयी. वीडियो के अनुसार भुकुलापारा, गंजुडीही, करलाखमन और जाम्माल आदि गांवों के पास बाघ के पंजे के निशान देखे गये.

बागडीही व बामड़ा रेंज से निकलकर बाघ के लैयकरा पहुंचने की आशंका

इसका पता चलने पर वन विभाग की टीम ने घटना स्थल पर पहुंचकर पुष्टि की कि यह पंजे के निशान बाघ के ही हैं. रेंजर वंदना पसायत ने कहा कि यह बाघ बागडीही और बामड़ा वन रेंज से होते हुए लैयकरा ब्लॉक में प्रवेश किया होगा. गौरतलब है कि 11 अगस्त को सुंदरगढ़ जिले के लेफ्रीपाड़ा के वन क्षेत्र में एक बाघ को घूमते देखा गया था. अधिकारियों ने कहा था कि सुंदरगढ़ वन प्रभाग के उजालपुर वन रेंज के पास एक गांव में बाघ के पैरों के निशान पाये गये, जिसके बाद अधिकारियों ने उस पर नजर रखने के लिए कई स्थानों पर कैमरे लगाये गये थे. सुंदरगढ़ प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) खुशवंत सिंह ने कहा था कि अभी तक हमने न तो बाघ को सीधे तौर पर देखा है और न ही ट्रैप कैमरा में जंगली जानवर की गतिविधि रिकॉर्ड हुई हैं. उन्होंने कहा था कि पैरों के निशानों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे बाघ के हैं या तेंदुए के.

20 सदस्यीय टीम रख रही नजर, 21 टेस्ट कैमरा लगाये जा रहे

झारसुगुड़ा वन मंडल के डीएफओ मनु अशोक भट्ट ने बताया कि तीन-चार दिन पहले सुंदरगढ़ और झारसुगुड़ा वन विभाग के सीमा क्षेत्र में बाघ के होने की खबर मिली थी. सोमवार सुबह वनराई रिजर्व फोरेस्ट के पास बाघ के पंजे के निशान देखे गये. उन्होंने कहा कि बाघ सुंदरगढ़ जिले से आया है और हमने 20 सदस्यीय टीम को बाघ की खोजबीन और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगा रखा है. वन विभाग ने लैयकरा ब्लॉक के जिन गांवों में बाघ के पंजे के निशान देखे गये हैं, वहां लोगों को सतर्क रहने और संध्या के बाद और सुबह-सुबह अकेले जंगल की तरफ नहीं जाने का अनुरोध किया है. साथ ही बाघ की गतिविधियों और उसकी सही लोकेशन का पता लगाने के लिए 21 टेस्ट कैमरा लगाये जा रहे हैं.

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Published by: Bipin kumar yadav

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