अस्पताल में घंटों गुल रही बिजली, मोबाइल की फ्लैश लाइट में हुआ मरीजों का इलाज

झारसुगुड़ा के सैटेलाइट अस्पताल में बिजली गुल होने से मरीजों को भारी परेशानी हुई. मोबाइल की फ्लैश लाइट में इलाज करने पर लोगों ने जताई नाराजगी और सुधार की मांग की.

झारसुगुड़ा : झारसुगुड़ा शहर के मंगल बाजार स्थित सैटेलाइट अस्पताल में बिजली गुल होने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. अस्पताल में वैकल्पिक बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण एक घंटे से अधिक समय तक अंधेरा छाया रहा. इस दौरान मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर मरीजों का इलाज किया गया. वहीं अचानक अस्पताल के अंधेरे में डूब जाने से मरीजों में भय और आक्रोश देखा गया. स्वास्थ्य सेवा संस्थान में बिजली कटने के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जतायी. वहीं मरीजों की सुरक्षा और निर्बाध चिकित्सा सेवा के लिए अस्पताल में तत्काल स्थायी जनरेटर सहित पर्याप्त बैकअप व्यवस्था करने की भी मांग की.

डीजी सेट में थी तकनीकी खराबी, की गयी मरम्मत

भाजपा मीडिया प्रभारी विमलेंदु भाेल ने कहा कि मंगल बाजार अस्पताल में बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बाधित हुई थी. डीजी सेट में तकनीकी खराबी के कारण समस्या उत्पन्न हुई, जिसे मरम्मत के बाद ठीक कर दिया गया. उन्होंने कहा कि अस्पताल खोलने की चुनौती को विधायक टंकधर त्रिपाठी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है और यदि कोई समस्या है, तो उसे सरकार जिम्मेदारी से दूर करने तैयार है.

लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायें : दीपाली

पूर्व विधायक दीपाली दास ने कहा कि झारसुगुड़ा जिले के अस्पताल में रोशनी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव दुखद और चिंताजनक है. अस्पताल में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही व लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अस्पतालों में डीजी सेट की व्यवस्था है, तो मंगल बाजार अस्पताल बिजली कटने के दौरान अंधेरे में क्यों रहा.

सौर ऊर्जा से रोशनी की व्यवस्था हो : उपनगरपाल

झारसुगुड़ा के उपनगरपाल राजू पाणिग्राही ने मंगल बाजार सैटेलाइट अस्पताल में स्थायी डीजी सेट लगाने की मांग की. उन्होंने जिले के सभी चिकित्सा केंद्रों की बिजली व्यवस्था की जांच कर पहले से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही. अस्पतालों में वैकल्पिक रोशनी के लिए सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. अस्पताल में अंधेरा होने पर मरीजों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं.


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By Aditya Tiwari

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