Rourkela News : औद्योगिक शहर राउरकेला और आसपास के इलाकों में सड़क दुर्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. जनवरी 2025 से मई 2026 तक सिर्फ 17 महीनों में यहां हुए 656 सड़क हादसों में 329 लोगों की जान जा चुकी है. यह आंकड़ा राज्य के किसी भी अन्य जिले से ज्यादा है. राउरकेला व आस-पास के इलाके में सड़क दुर्घटनाओं में हर महीने औसतन 20 लोगों की मौतें हो रही हैं.
जनवरी से मई 2026 के बीच 179 दुर्घटनाएं हुईं
परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 477 सड़क दुर्घटनाओं में 235 लोगों की मौत हुई और 229 लोग घायल हुए. वहीं सिर्फ जनवरी से मई 2026 के बीच 179 दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 94 लोगों की मौत हुई और 100 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. इसमें जनवरी, 2025 में 39 हादसों में 21 मौतें, फरवरी में 45 दुर्घटनाओं में 22 मौतें, मार्च में 44 दुर्घटनाओं में 29 मौतें, अप्रैल में दुर्घटनाओं 39 में 20 मौतें, मई में 38 दुर्घटनाओं में 15 मौतें, सितंबर में 34 दुर्घटनाओं में 19 मौतें, अक्तूबर में 47 दुर्घटनाओं में 24, नवंबर में 37 दुर्घटनाओं में 14 मौतें और दिसंबर 2025 में 49 हादसों में 26 लोगों की मौत हुई. वर्ष 2026 में जनवरी में 41 हादसों में 25 मौतें, फरवरी में 27 दुर्घटनाओं में 17 मौतें, मार्च में 36 दुर्घटनाओं में 19 मौतें, अप्रैल में 17 दुर्घटनाओं में 18 मौतें और मई में 38 दुर्घटनाओं में 15 मौतें हईं. जून में भी जलदा, देवगांव, शॉ मिल, लाठीकटा, लहुणीपाड़ा जैसे इलाकों में 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.
आरटीओ और पुलिस के जागरुकता अभियान का नहीं दिख रहा असर
राउरकेला के बाहरी इलाकों में छोटे-बड़े कल-कारखाने और उद्योग हैं. रोजाना हजारों भारी वाहन यहां आते-जाते हैं. परिवहन व्यवस्था मजबूत होने के कारण अन्य जिलों से भी लोग यहां आते हैं. वाहनों की भारी आवाजाही के कारण हर दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं. क्षेत्रीय परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा लगातार जांच अभियान चलाने के बावजूद हादसों में कमी नहीं आ रही है. राउरकेला पुलिस जिले में हादसों और मौतों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है, जिससे आम लोगों में डर का माहौल है. इसकी रोकथाम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग हो रही है.
