Rourkela News: भारत के स्वाधीनता आंदोलन में वीर बिरसा मुंडा की भूमिका अद्वितीय: आलोक वर्मा

Rourkela News: धरती आबा वीर बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को आरएसपी के डीआइसी आलोक वर्मा ने संबोधित किया.

Rourkela News: शहर के बिरसा मुंडा चौक पर स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा वीर बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती शनिवार को मनायी गयी. अतिथियों ने वीर बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राउरकेला स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक आलोक वर्मा, विशिष्ट अतिथि राउरकेला की अतिरिक्त जिलापाल और महानगर निगम आयुक्त दीना दस्तगीर, राउरकेला स्टील प्लांट के कार्यकारी निदेशक तरुण कुमार मिश्रा, पानपोष उपजिलापाल विजय कुमार नायक, बिरसा मुंडा प्रतिमा समिति के अध्यक्ष रंजीत कुमार टोप्पो, सूचना और जनसंपर्क अधिकारी सीमा फातिमा एक्का और बिरसा मुंडा प्रतिमा समिति के सचिव विजय कुमार टोप्पो उपस्थित थे.

विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत

मुख्य अतिथि आलोक वर्मा ने कहा कि झारखंड में जन्मे महापुरुष बिरसा मुंडा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं में से एक थे. स्वाधीनता आंदोलन में उनकी भूमिका अद्वितीय है. झारखंड में बिरसा मुंडा को भगवान के रूप में पूजा जाता है. उन्होंने कहा कि हर दिन वह राउरकेला स्टील प्लांट कार्यालय बिरसा मुंडा का अभिवादन करने के बाद जाते हैं. विशिष्ट अतिथि दीना दस्तगीर ने कहा कि उन्हें स्वतंत्रता सेनानी और महापुरुष बिरसा मुंडा की बहादुरी के बारे में जानकर बहुत खुशी और गर्व हुआ. बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किये और बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों के विद्यार्थियों के बीच आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया.

बिसरा में धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण

झामुमो ने शनिवार को धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बिसरा के बिरसा चौक में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण किया. पारंपरिक रीति-रिवाज से ढोल-नगाड़ा बाजा व नृत्य कर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. झामुमो के केंद्रीय सदस्य लेथा तिर्की ने कहा कि बिरसा मुंडा एक महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उनका जन्म 15 नवंबर, 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में हुआ था. बिरसा मुंडा को ‘धरती आबा’ भी कहा जाता है. उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन गरीबी और संघर्ष से भरा था. उन्होंने अपनी शिक्षा जर्मन मिशन स्कूल में प्राप्त की, लेकिन मिशनरियों की नीतियों से असंतुष्ट होकर उन्होंने स्कूल छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ना शुरू किया. बिरसा मुंडा ने 1899 में ‘उलगुलान’ आंदोलन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा करना था. इस आंदोलन में उन्होंने अंग्रेजों और जमींदारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. इस अवसर पर बिसरा के पूर्व सरपंच सोमा मुंडा ने कहा कि बिरसा मुंडा की विरासत आज भी आदिवासी समाज में जीवित है. उन्हें एक महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता के रूप में याद किया जाता है. उनकी जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनायी जाती है. इस अवसर पर डरईकेला के पूर्व सरपंच देवा केरकेट्टा, झामुमो नेता जीतू महतो, रंजीत कछुआ, सुखराम ओराम, अजय ओराम, सिरिल लकड़ा आदि उपस्थित थे.

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Published by: Bipin kumar yadav

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