Rourkela News: 340 करोड़ से बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आठ साल बाद भी नहीं हुआ चालू, ब्राह्मणी नदी में बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर

Rourkela News: राउरकेला में 340 करोड़ की लागत से बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आठ साल बाद भी चालू नहीं हो सका है.

Rourkela News: राज्य की 16 प्रदूषित नदियों की सूची में ब्राह्मणी नदी का नाम शामिल होने के बाद चिंता बढ़ गयी है. पिछले दिनों विधानसभा में विभागीय मंत्री द्वारा यह जानकारी दिये जाने के बाद राउरकेला में हलचल तेज हो गयी है. रोजाना कारखानों, अस्पतालों और होटलों से निकलने वाला अनुपचारित अपशिष्ट जल सीधे ब्राह्मणी नदी में गिर रहा है.

बुद्धिजीवियों और पर्यावरणविदों ने जतायी नाराजगी

शहर के सीवेज ट्रीटमेंट के लिए 340.25 करोड़ रुपये की लागत से बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आठ साल बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाया है. डीपीआर के अनुसार परियोजना के तहत 186 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने, सात पंप हाउस और दो एसटीपी स्थापित किये जाने थे. जनवरी 2017 में शुरू हुआ काम 2020 तक पूरा होना था. विभागीय अधिकारियों के बार-बार कहने के बावजूद एजेंसी 2022 तक भी काम पूरा नहीं कर सकी. अभी भी कई घर, अस्पताल, होटल और रेस्तरां सीवर लाइन से नहीं जुड़ पाये हैं. नतीजा ब्राह्मणी नदी में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. बुद्धिजीवियों और पर्यावरणविदों ने इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद नदी के प्रदूषित होने पर नाराजगी जतायी है. नदी पर निर्भर आसपास के लोग और मवेशी रोजमर्रा के कामों के लिए इसका पानी इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनका जीवन खतरे में है. चेतावनी दी गयी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में ब्राह्मणी नदी क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीवेज बोर्ड उठाये कदम : विधायक

राउरकेला विधायक शारदा प्रसाद नायक ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीवेज बोर्ड दोनों को ब्राह्मणी नदी में प्रदूषण रोकने के लिए सतर्क रहना चाहिए. साथ ही ट्रीटमेंट प्लांट को युद्धस्तर पर चालू करने की जरूरत है. क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी इंजीनियर अनूप कुमार मल्लिक ने बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं और कारखानों-अस्पतालों की संयुक्त अपशिष्ट जल उपचार परियोजना को पूरी तरह चालू करने पर काम चल रहा है.

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