Bhubaneswar News: ओडिशा में भाजपा की डबल इंजन सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य की प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की विकास योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2036 तक ‘समृद्ध ओडिशा’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए तेज गति से कार्य कर रही है और विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव किये जा रहे हैं. कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री प्रभाती परिडा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, मुख्य सचिव अनु गर्ग व अन्य लोग उपस्थित थे.
स्वास्थ्य, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक विकास में बड़े सुधारों का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दो वर्षों में सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा, तकनीकी विकास और सुशासन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है. उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के सहयोग और ‘डबल इंजन मॉडल’ के कारण विकास कार्यों में तेजी आयी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बनने के बाद आयुष्मान भारत-गोपबंधु जन आरोग्य योजना को लागू किया गया, जिसके तहत 3.46 करोड़ लाभार्थियों को देशभर के 32,000 से अधिक अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है. स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के तहत कई नये मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू किये गये हैं, जिनमें महाराजा ययाति केसरी मेडिकल कॉलेज, पवित्र मोहन प्रधान मेडिकल कॉलेज, तालचेर और कंधमाल शामिल हैं. नवरंगपुर मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी गयी है, जबकि जगतसिंहपुर, ढेंकानाल और भद्रक में नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रस्तावित है. आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए रायरंगपुर में नया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल स्थापित किया जा रहा है. इसके अलावा तीन नये आयुर्वेदिक और दो होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की योजना है. पिछले दो वर्षों में 5,197 मेडिकल अधिकारियों और पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति की गयी है.
दो साल में 9000 किमी सड़कें, 57 पुल और चार आरओबी का हुआ निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 72,100 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय निर्धारित किया है, जो राज्य के जीडीपी का लगभग 6.5 प्रतिशत है और देश में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है. पिछले दो वर्षों में लगभग 9,000 किलोमीटर सड़कें, 57 पुल और चार रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है, जिस पर लगभग 17,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. भुवनेश्वर में ट्रैफिक सुधार के लिए 36 सड़कों की मास्टर प्लान परियोजना को मंजूरी दी गयी है, जिनमें से आठ परियोजनाओं पर 1200 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सरकार ने कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की शुरुआत की है, जिनमें अटल एक्सप्रेसवे, नमो एक्सप्रेसवे, ब्रह्मपुर-जयरपुर एक्सप्रेसवे, भुवनेश्वर राइट एक्सेस रोड नेटवर्क और जयदेव विहार-नंदनकानन कॉरिडोर शामिल हैं.20 लाख करोड़ के मिले निवेश प्रस्ताव, 17 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा को औद्योगिक केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘उत्कर्ष ओडिशा’ जैसे निवेश सम्मेलन आयोजित किये गये, जिनसे अब तक लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इनसे लगभग 17 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है. सिंगल विंडो प्रणाली के तहत 433 औद्योगिक परियोजनाओं को 8.69 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी दी गयी है, जिनसे 5.25 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे. इसके अलावा 114 परियोजनाओं का शिलान्यास और 34 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है. सरकार ने कहा कि उसका लक्ष्य सभी जिलों में संतुलित औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना है.महिलाओं के खिलाफ दोषसिद्धि 87.6 प्रतिशत तक पहुंची
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में नक्सल और माओवादी हिंसा में उल्लेखनीय कमी आयी है और ओडिशा लगभग हिंसा मुक्त स्थिति की ओर बढ़ रहा है. महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर 2023 के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर जून 2025 तक 62 प्रतिशत हो गयी है. भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद कुल दोषसिद्धि दर 87.6 प्रतिशत तक पहुंच गयी है. पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 21,186 नये पदों के सृजन की घोषणा की गयी है.
तकनीक और सेमीकंडक्टर हब की दिशा में बढ़ा कदम
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने तकनीकी विकास को प्राथमिकता देते हुए 1100 करोड़ रुपये की तकनीकी विकास योजना को मंजूरी दी है. भुवनेश्वर के पास 77 एकड़ भूमि पर 300 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक साइंस सिटी विकसित की जा रही है. सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए अलग नीतियां लागू की गयी हैं. राज्य में तीन सेमीकंडक्टर यूनिट और पांच ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित किये जा रहे हैं.राज्य सरकार के प्रयास से गांवों में विकास हुआ तेज
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में ओडिशा देश का प्रमुख तकनीकी हब बनेगा. उन्होंने कहा कि पिछले 32 वर्षों (1992-2023) में 1,075 राजस्व गांव घोषित किये गये थे, जबकि पिछले दो वर्षों में ही 946 नये राजस्व गांव बनाये गये हैं. 28,531 भूमिहीन परिवारों को चार डिसमिल भूमि के पट्टे दिये गये हैं. 25,643 शैक्षणिक संस्थानों को भूमि आवंटित की गयी है और 108 नये सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोले गये हैं. वहीं सरकार ने सिंचाई विस्तार को प्राथमिकता देते हुए कई परियोजनाएं पूरी की हैं. छह इन-स्ट्रीम स्टोरेज परियोजनाओं से 50 गांवों में जल भंडारण क्षमता बढ़ी है. 1941 किलोमीटर लंबी आरसीसी लाइनिंग चैनलों के माध्यम से 78,572 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा दी गयी है. 27,325 नयी लिफ्ट सिंचाई योजनाओं से 1.82 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित की गयी है. सरकार ने अगले चार वर्षों में 15 लाख हेक्टेयर सिंचाई लक्ष्य रखा है. ग्रामीण विद्युतीकरण में तेजी के साथ 2027 तक सभी गांवों को बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है.
