क्योंझर, मयूरभंज, कालाहांडी और नवरंगपुर में भारी बारिश को लेकर चेतावनी, बाढ़ प्रभावित जिलों में बढ़ेंगी मुश्किलें

ओडिशा सरकार ने बाढ़ और बारिश की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं. कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि राहत और बचाव कार्य जोर-शोर से चल रहे हैं.

भुवनेश्वर : ओडिशा सरकार ने राज्य में जारी बाढ़ और बारिश की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं. राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसइओसी) की ओर से जारी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बाढ़ की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है. हालांकि, सभी जिला प्रशासन को किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिये गये हैं.

गरज के साथ 30-40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, देवगढ़, अनुगूल, ढेंकानाल, क्योंझर, मयूरभंज, सुबर्णपुर, बौध, नुआपड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, कंधमाल, नबरंगपुर, रायगढ़ा, कोरापुट और मालकानगिरी जिलों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बारिश होने की संभावना है. क्योंझर, मयूरभंज, कालाहांडी और नबरंगपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश होने की आशंका है. कुछ जिलों में बिजली चमकने और गरज के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जतायी गयी है.

प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे

शनिवार सुबह 11 बजे तक महानदी, ब्राह्मणी, बैतरणी, बूढ़ाबलंग, सुवर्णरेखा और जलका समेत प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे और चेतावनी स्तर से नीचे रहा, जो राहत की बात है. 22 अगस्त की सुबह तक पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन 6.8 मिमी बारिश दर्ज की गयी. इस दौरान खुर्दा जिले के चिलिका ब्लॉक में सर्वाधिक 93 मिमी बारिश हुई. 11 ब्लॉकों में 50 मिमी से अधिक और 21 ब्लॉकों में 25 से 50 मिमी बारिश दर्ज की गयी. एक से 22 अगस्त के बीच राज्य में कुल 272.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य बारिश 252.6 मिमी की तुलना में 7.8 प्रतिशत अधिक है. वहीं, एक जून से 22 अगस्त तक राज्य में 1,028.4 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जो सामान्य 797 मिमी के मुकाबले 29 प्रतिशत अधिक है.

बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर और केंद्रापाड़ा बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर और केंद्रापड़ा जिलों के विभिन्न क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बालेश्वर जिले के छह ब्लॉकों की 50 ग्राम पंचायतों और 327 गांवों में बाढ़ का असर पड़ा है. इनमें 129 गांव जलमग्न या जलवंदित हैं और 24,709 लोग प्रभावित हुए हैं. कुल 17,799 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है तथा 89 राहत शिविरों के माध्यम से उन्हें आश्रय और सहायता उपलब्ध करायी जा रही है. भद्रक जिले के चार ब्लॉकों की 32 ग्राम पंचायतों और 143 गांवों में बाढ़ का प्रभाव पड़ा है. कुल 1,51,932 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 20,567 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है. जिले में 23 राहत शिविर संचालित हैं. जाजपुर के पांच ब्लॉकों की 24 ग्राम पंचायतों और 69 गांवों में बाढ़ का असर है. इनमें 48 गांव जलवंदित हैं और 71,425 लोग प्रभावित हुए हैं. जिले में राहत एवं बचाव के लिए 334 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं. केंद्रापड़ा में पांच ब्लॉकों की 67 ग्राम पंचायतों और 164 गांवों में बाढ़ का प्रभाव पड़ा है. 42 गांव जलवंदित हैं और 2,47,493 लोग प्रभावित हुए हैं. कुल 2,323 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है तथा 18 राहत शिविरों में सहायता उपलब्ध करायी जा रही है.

ओड्राफ और एनडीआरएफ की 86 टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटीं

बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्यों के लिए कुल 86 बचाव दल तैनात किये गये हैं. इनमें 32 ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ओड्राफ), आठ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और 46 फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें शामिल हैं. राहत शिविरों के संचालन, बचाव कार्यों और अन्य बाढ़ प्रबंधन गतिविधियों के लिए राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) से चरणबद्ध तरीके से कुल 167.55 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं. इनमें 110 करोड़, 26 करोड़ और 31.55 करोड़ रुपये की किस्तें शामिल हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 21,445 पैकेटों में 1,07,225 पॉलीथिन शीट उपलब्ध करायी गयी हैं. इसके अलावा विभिन्न जिलों को कुल 1,431.09 मीट्रिक टन पशु चारा भी उपलब्ध कराया गया है.

आपात स्थिति से निबटने के लिए राज्य सरकार ने जारी किया निर्देश

राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को स्थानीय जलभराव, निचले इलाकों में पानी जमा होने तथा शहरी क्षेत्रों में अंडरपास बंद होने जैसी स्थितियों के प्रभावी प्रबंधन के निर्देश दिये हैं. कच्ची सड़कों को नुकसान, भूस्खलन तथा जलभराव के कारण बागवानी और खड़ी फसलों को संभावित नुकसान को लेकर भी सतर्क रहने को कहा गया है. बिजली गिरने की घटनाओं के दौरान लोगों को मौसम संबंधी सूचनाओं पर नजर रखने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गयी है. विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय में स्थापित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र सभी जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है और 24 घंटे स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है. राज्य सरकार ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और आवश्यक सहायता का कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेगा तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है.


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By Bipin kumar yadav

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