Sambalpur News: महानदी गांव के पास से बहती है, लेकिन गांव में पानी नहीं है. ग्रामीण पीने के पानी के लिए परेशान हैं. पीने के पानी की आपूर्ति के लिए बनायी गयी सरकार की सारी योजनाएं फेल साबित हो रही हैं. अब लोग गांव से दूर नाला से पानी लाने के लिए चुआं खोद रहे हैं.
टाइगर प्रोजेक्ट के अंदर होने के कारण महानदी के पास जाने की नहीं है अनुमति
अनुगूल जिले के सतकोशिया टाइगर प्रोजेक्ट के तहत आने वाले करदापाड़ा गांव में ऐसे हालात देखे जा रहे हैं. एक तरफ महानदी का विशाल नीला पानी है, तो दूसरी तरफ घने जंगलों से ढकी पहाड़ियां. बीच में करदापाड़ा गांव है. महानदी टाइगर प्रोजेक्ट के अंदर से होकर गुजरती है, जिससे ग्रामीणों को वहां जाने की अनुमति नहीं है. वहीं गांव से महानदी की दूरी भी अधिक है. गांव में करीब 120 परिवारों के 600 से ज्यादा लोग रहते हैं. लोग खेती, जंगल से मिलने वाली सामग्रियों को इकट्ठा करके और मेहनत-मजदूरी करके गुजारा करते हैं. उनकी सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की कमी है.
10 चापाकल खराब, दो कुएं भी सूखे
गर्मी की शुरुआत से ही पानी की समस्या बहुत बढ़ गयी है. गांव में 10 से ज्यादा चापाकल खराब हैं. दो कुएं पूरी तरह सूख गये हैं. सरकार की तरफ से करीब पांच साल पहले एक बोरवेल खोदा गया था और पाइप से पानी की सप्लाई के लिए एक टैंक बनाया गया था. पूरे गांव में पाइप बिछे हुए हैं. लेकिन गर्मी का मौसम आते ही बोरवेल सूख जाता है और पानी की सप्लाई बंद हो जाती है. इस समस्या को देखते हुए ग्रामीण जलापूर्ति विभाग और पंचायत ने टैंकरों से लोगों को पानी सप्लाई करने का इंतजाम किया है. लेकिन 4/5 दिन में एक बार पानी की सप्लाई हो रही है. इसलिए लोगों को गर्मी में पीने और नहाने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है. पानी के बिना पालतू जानवरों की हालत भी बहुत खराब हो गयी है. लोग पिछले दो महीनों से पानी के लिए जूझ रहे हैं.
जलेश्वर नाला के किनारे चुआं खोदकर पानी संग्रह करती हैं महिलाएं
गांव से करीब एक किलोमीटर दूर जलेश्वर नामक एक जंगली नाला बहता है. गर्मी के मौमस में नाले का पानी सूख जाता है. गांव की महिलाएं उस नाले के पास चुआं खोदकर पानी इकट्ठा करती हैं. नाला सूखने के कारण चुआं में भी पानी नहीं आता है. इसलिए एक बाल्टी पानी भरने में बहुत समय लगता है और उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. कई बार पानी के लिए महिलाओं में झगड़े भी हो जाते हैं. इस बारे में पूछे जाने पर टिकर पाड़ा के सरपंच समीर रंजन साहू का कहना है कि करदापाड़ा गांव बहुत पुराना है. यहां हमेशा से पीने के पानी की दिक्कत रही है. उन्होंने खुद इसके स्थायी हल के लिए ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, जिला प्रशासन और सरकार को पत्र लिखा है. लेकिन वे इसे यह कहकर टाल रहे हैं कि करदापाड़ा गांव की समस्या आने वाली वृहद जलापूर्ति परियोजना से हल हो जायेगी.
