देव नदी पर ब्रिज का निर्माण पूरा करने की मांग पर मुक्तिकांत बिस्वाल का धरना शुरू

देव नदी पर ब्रिज निर्माण कार्य 90 दिनों में पूरा करने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन नौ माह बाद भी इस दिशा में पहल नहीं होने पर मुक्तिकांत बिस्वाल ने एक बार फिर धरना शुरू कर दिया है.

राउरकेला. जिला प्रशासन की ओर से देव नदी पर अधूरा ब्रिज का निर्माण कार्य 90 दिनों में पूरा करने का भरोसा दिया गया था. लेकिन वर्तमान नौ महीने का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है. जिससे इस मांग को लेकर विगत दिनों आमरण अनशन चलानेवाले समाजसेवी मुक्तिकांत बिस्वाल ने पानपोष उप-जिलापाल कार्यालय के समक्ष बुधवार से 21 दिनों के लिए बेमियादी धरना शुरू कर दिया गया है. मुक्तिकांत बिस्वाल ने कहा ओडिशा सरकार के ग्राम विकास विभाग की ओर से राउरकेला स्थित मिंटकुदरी से सिमरदा मार्ग पर देव नदी में 153.15 मीटर पुल का निर्माण करने की योजना तैयार की गयी थी. जिसमें 30 जून, 2018 को इसका काम शुरू किया गया था. लेकिन छह साल के बाद भी यह पुल बनकर तैयार नहीं होने से 20 हजार ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस पुल के निर्माण में निजी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाना बाधक बन रहा है.

जमीन अधिग्रहण किये बिना काम शुरू करने पर उठाया सवाल

अनशनकारियों ने सवाल उठाया है कि 792.95 लाख रुपये की लागत वाले इस पुल के लिए पूरी तरह से निजी जमीन का अधिग्रहण नहीं करने तथा जमीन मालिकों काे उपयुक्त मुआवजा नहीं देने के बाद भी इसका काम शुरू कैसे किया गया था. वहीं ग्रामीणों के हितों के ध्यान में रखते हुए समाजसेवी मुक्तिकांत बिस्वाल ने गांधी जयंती पर अपने सहयोगियों के साथ 21 दिन धरना, नौ दिनों तक आमरण अनशन व एक दिन के लिए रास्ता रोको आंदोलन चलाया था. जिस पर राउरकेला प्रशासन ने 90 दिनों में पुल का काम पूरा करने का भरोसा दिया था. लेकिन अब तक नाै महीने बीत जाने से भी यहां की स्थिति जस की तस है.

ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाया अस्थायी पुल

बिरमित्रपुर विधायक रोहित जोसेफ तिर्की की देखरेख में यहां ग्रामीणों की सुविधा के लिए लोहे का अस्थायी पुल बना दिया गया है. जिसमें पुल के दोनों ओर बांस की रेलिंग भी लगायी गयी है. लेकिन इस ब्रिज पर वाहन चलाकर जाने की मनाही है. इससे इस समस्या का अस्थायी समाधान ही हुआ है. जिससे इसका स्थायी समाधान करने की मांग पर समाजसेवी मुक्तिकांत बिस्वाल ने बुधवार से यह धरना शुरू किया है. इस धरना में गोपाल जेना, रंजन लेंका, चंद्रकांत जेना,रतिकांत स्वांई, पवन कलस, स्मृतिरंजन स्वांई शामिल हैं.

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