Bhubaneswar News: समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों, समाधानों और भविष्य की कार्ययोजना पर हुई चर्चा

Bhubaneswar News: ओडिशा पुलिस के राज्यस्तरीय तटीय सुरक्षा सम्मेलन-2026 में डीजीपी ने समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया.

Bhubaneswar News: ओडिशा पुलिस की तटीय सुरक्षा शाखा की ओर से गुरुवार को पुलिस भवन में ‘राज्यस्तरीय तटीय सुरक्षा सम्मेलन-2026’ का आयोजन किया गया. ‘तटीय सुरक्षा व्यवस्था : समस्याएं, समाधान और आगामी कदम’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में राज्य की समुद्री सुरक्षा प्रणाली की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों, संभावित समाधानों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गयी.

राज्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाती है 574.7 किलोमीटर लंबी तटरेखा

कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य पुलिस महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया ने मुख्य अतिथि के रूप में किया. उन्होंने कहा कि तटीय सुरक्षा देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आर्थिक विकास, समुद्री व्यापार और नागरिक सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि ओडिशा की 574.7 किलोमीटर लंबी तटरेखा तथा पारादीप, धामरा और गोपालपुर जैसे प्रमुख बंदरगाह राज्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. डीजीपी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ओडिशा पुलिस ने तटीय सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. वर्तमान में राज्य के 18 मरीन पुलिस थानों में 700 से अधिक कर्मी तैनात हैं. इसके साथ ही 15 फास्ट इंटरसेप्टर बोट, पांच ड्रोन और पांच किराये के ट्रॉलरों के माध्यम से समुद्री गश्त को और अधिक प्रभावी बनाया गया है. उन्होंने भुवनेश्वर स्थित कमांड, कंट्रोल और ट्रेनिंग सेंटर की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया, जो तटीय सुरक्षा गतिविधियों के समन्वय और निगरानी का कार्य कर रहा है. इसके अलावा ‘नाभामित्र’ एप के माध्यम से मछली पकड़ने वाली नौकाओं की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है. इस प्रणाली में सेवानिवृत्त नौसेना और तटरक्षक अधिकारियों की सेवाओं को भी शामिल किया गया है.

सीसीटीवी निगरानी और एंटी-ड्रोन सिस्टम से तटीय सुरक्षा को किया जायेगा मजबूत

डीजीपी खुरानिया ने कहा कि भविष्य में तटीय सुरक्षा को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए 10 अतिरिक्त फास्ट इंटरसेप्टर बोट, अतिरिक्त ट्रॉलर, मिनी कंट्रोल सेंटर, मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों और फिश लैंडिंग केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, मॉड्यूलर जेटी और आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किये जायेंगे. उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग और मछुआरा समुदाय की सक्रिय भागीदारी तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है. कार्यक्रम में डीजीपी (कारागार एवं सुधार सेवाएं) सुशांत कुमार नाथ, डीजीपी (क्राइम ब्रांच) विनयतोष मिश्रा और खुफिया निदेशक आरपी कोचे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. अतिरिक्त डीजीपी (तटीय सुरक्षा) अरुण बोथरा ने सम्मेलन के उद्देश्यों और तटीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला. वहीं पूर्व सत्रों में गृह मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, भारतीय तटरक्षक बल, सीआइएसएफ तथा केरल पुलिस के विशेषज्ञों ने तटीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किये.

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