Bhubaneswar News: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि समुद्र केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह अवसरों, समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का प्रवेश द्वार है. उन्होंने बुधवार को लोक सेवा भवन में आयोजित 14वीं मल्टी एजेंसी मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप (पॉलिसी) बैठक का उद्घाटन करते हुए यह बात कही.
पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित हुई राष्ट्रीय स्तर की समुद्री सुरक्षा बैठक
मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सदी है और भारत आज विश्व की एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा कि पहली बार नयी दिल्ली से बाहर ओडिशा में इस उच्चस्तरीय राष्ट्रीय बैठक का आयोजन होना को-ऑपरेटिव फेडरलिजम के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि देश के समुद्र, बंदरगाह, मत्स्य संसाधन और ब्लू इकोनॉमी भारत की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्तियां हैं. इनकी सुरक्षा केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और समुद्र पर निर्भर लाखों तटीय लोगों की आजीविका के लिए भी अत्यंत आवश्यक है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में समुद्री सुरक्षा केवल पारंपरिक कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र जागरुकता, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण जैसी अनेक चुनौतियां शामिल हैं. ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की लगभग 575 किलोमीटर लंबी तटरेखा बंगाल की खाड़ी के किनारे फैली हुई है. प्राचीन काल में कलिंग के समुद्री व्यापारी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंध स्थापित करते थे, जिसकी जीवंत झलक आज भी बाली यात्रा उत्सव में देखने को मिलती है.
भारत की समुद्री विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा ओडिशा
मुख्यमंत्री ने कहा भारत की समुद्री विकास यात्रा में ओडिशा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. राज्य की रणनीतिक समुद्री स्थिति को और मजबूत करने के लिए गंजाम में एक गहरे समुद्री बंदरगाह तथा पारादीप के निकट एक शिप बिल्डिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा सरकार केंद्र सरकार की ‘सागर’ (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रिजन ), ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, बीमस्टेक तथा ‘कोस्टल सिक्योरिटी स्कीम फेज-3’ जैसी प्रगतिशील पहलों का पूर्ण समर्थन करती है. उन्होंने समुद्री सुरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), मानव रहित प्रणालियों और अत्याधुनिक निगरानी नेटवर्क के उपयोग पर विशेष जोर दिया. मुख्यमंत्री ने मछली पकड़ने वाली नौकाओं में ‘नभमित्र’ ट्रांसपोंडर लगाने तथा ‘कोस्टल वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसी योजनाओं को समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल, ओडिशा पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में निभायी जा रही भूमिका की सराहना की.
