NCP विधायक सरोज बाबूलाल अहिरे अपने नवजात बच्चे के साथ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शामिल होने पहुंचीं

सरोज बाबूलाल अहिरे 30 सितंबर को मां बनी हैं और आज वे विधानसभा के सत्र में भाग लेने के लिए अपने नवजात के साथ पहुंचीं.

महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र जब आज से शुरू हुआ तो एक बहुत ही रेअर लेकिन सुंदर दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की विधायक सरोज बाबू अहिरे अपने दो माह के बच्चे को लेकर विधानसभा पहुंची. सरोज अहिरे 40 साल की हैं और 2019 के विधानसभा चुनाव में देवली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर आयीं हैं.

30 सितंबर को बनी हैं मां

सरोज बाबूलाल अहिरे 30 सितंबर को मां बनी हैं और आज वे विधानसभा के सत्र में भाग लेने के लिए अपने नवजात के साथ पहुंचीं. उन्होंने मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए कहा कि पिछले ढाई साल से कोविड 19 की वजह से नागपुर में कोई सत्र आयोजित नहीं किया गया था. मैं अब एक मां हूं लेकिन मैं विधायक भी हूं इसलिए अपने मतदाताओं के लिए उनके सवालों का जवाब लेने विधानसभा आयी हूं.


पहली बार कोई विधायक अपने बच्चे के साथ दिखीं

संभवत: यह देश में पहला मामला है, जब कोई विधायक अपने नवजात बच्चे के साथ विधानसभा पहुंचीं हैं. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या वे अपने बच्चे के साथ विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुई या नहीं. वैसे लोकसभा की वेबसाइट पर इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी है कि क्या कोई महिला सदस्य अपने अपने बच्चे के साथ सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकती है या नहीं.

ब्रिटेन में मचा था बवाल

ब्रिटेन में पिछले साल बच्चे के साथ संसद आने पर लेबर पार्टी की सांसद स्टेला क्रीजी ​को रोक दिया गया था. उन्हें यह कहकर रोका गया था कि अगर यह परंपरा बन गयी तो भविष्य में परेशानी बढ़ सकती है. हालांकि ब्रिटेन में बच्चे के साथ आने की परंपरा रही है 2018 में लिबरल डेमोक्रेट जो स्विंसन पहली महिला सांसद बनी थीं, जो बच्चे के साथ संसद पहुंची थीं. स्टेला क्रीजी की एक तस्वीर भी चर्चा में रही थी जिसमें वे अपने बच्चे के साथ संसद की कार्यवाही में शामिल थीं. ब्रिटेन में यह मांग की जा रही है कि बच्चे के साथ संसद की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी जाये.

केन्या में महिला सांसद को बाहर किया गया था

केन्या की संसद में महिला सांसद जुलैखा हसन जब अपने पांच महीने के बच्चे के साथ आयीं थीं तो उन्हें बाहर जाने को कह दिया गया था. उनसे यह कहा गया था कि वे बच्चे को बाहर छोड़कर आ सकती हैं. उनपर संसद में कई सांसदों ने चिल्लाया भी था जिसका विरोध हुआ था.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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