JSSC CGL: कल तक थे आप-सर! आज हुए बेरोजगार! नियुक्ति रद्द होने के बाद छलका युवाओं का दर्द

झारखंड में JSSC CGL नियुक्ति रद्द किए जाने से करीब 2000 युवाओं के भविष्य पर संकट आ गया है. जो कल तक सरकारी अधिकारी थे, आज खुद को बेरोजगार बता रहे हैं. नियुक्ति रद्द करने के खिलाफ कर्मचारी सड़क पर उतर आए हैं.

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

रांची: एक फैसला और करीब 2000 युवाओं के भविष्य पर संकट. झारखंड में JSSC CGL नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों का दर्द अब खुलकर सामने आ रहा है. कल तक जो युवा सरकारी दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारी के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, आज वे खुद को बेरोजगार बता रहे हैं.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से JSSC CGL नियुक्ति रद्द किए जाने के ऐलान के बाद राजधानी रांची में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है. बारिश के बीच भी कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के सामने डटे हुए हैं. उनका कहना है कि नियुक्ति रद्द करने से पहले उनका पक्ष तक नहीं सुना गया और उन्हें लिखित रूप से भी इसकी सूचना नहीं दी गई.

कोई स्टैटिस्टिक्स अफसर था, कोई रेलवे में, कोई दूसरे राज्य में सरकारी नौकरी कर रहा था प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की कहानी एक जैसी नहीं है, लेकिन दर्द लगभग एक जैसा है.

JSSC CGL में चयन के बाद इन युवाओं ने झारखंड लौटने की उम्मीद में अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दीं. कई अभ्यर्थियों ने बेहतर भविष्य और अपने गृह राज्य में सेवा करने के सपने के साथ JSSC की नौकरी ज्वाइन की थी.

अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है—क्या वे अपनी पुरानी नौकरी में वापस लौट पाएंगे?

मेरिट से आया हूं, पूरी जिंदगी पढ़ाई में अव्वल रहा, आज बेरोजगार हूं’

प्रदर्शन में शामिल एक युवक ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि उसने पूरी जिंदगी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन किया. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में वर्षों लगाए और अपनी मेहनत के दम पर JSSC CGL में चयन हासिल किया.

उसका कहना था कि “मैं मेरिट से आया हूं. पूरी जिंदगी पढ़ाई में अव्वल रहा. जब नौकरी मिली तो लगा कि मेहनत सफल हुई, लेकिन आज वही नौकरी नहीं है और मैं बेरोजगार हूं.” युवक की बात सुनकर आसपास मौजूद दूसरे कर्मचारी भी भावुक हो गए.

हमने मेरिट से नौकरी पाई, पैसे देकर नहीं

कर्मचारियों का कहना है कि JSSC CGL को लेकर लंबे समय से ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे पूरी नियुक्ति प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में हो. उनका आरोप है कि JSSC के खिलाफ NEGATIVE NARRATIVE तैयार किया गया, लेकिन जो अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर चयनित हुए, उनकी बात सामने नहीं आ सकी.

एक कर्मचारी ने सवाल उठाते हुए कहा, “हमने मेरिट से नौकरी पाई है, पैसे देकर नहीं. अगर किसी अभ्यर्थी ने गड़बड़ी की है तो जांच हो और दोषी पर कार्रवाई हो, लेकिन पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को ही रद्द करना कहां का न्याय है?”

कल तक थे आप सर, आज हो गए बेरोजगार

जो युवा कल तक सरकारी कार्यालयों में अधिकारी या कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे थे, वे आज उसी सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर हैं. कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी पाने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से व्यवस्थित किया. किसी ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं तो किसी ने पुरानी नौकरी छोड़कर नई जगह ज्वाइन किया. अब अचानक नियुक्ति रद्द होने से पूरी व्यवस्था बिगड़ गयी है.

एक फैसले ने छीनी नौकरी?’

कर्मचारियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर चयन प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच होनी चाहिए थी. क्या एक फैसले के जरिए उन सभी अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द की जा सकती है, जिनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ है?

उनका कहना है कि नियुक्ति के समय भी जांच से जुड़ी शर्तें थीं. यदि जांच में कोई अभ्यर्थी अनियमितता या धांधली में शामिल पाया जाता है तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती थी. ऐसे में पूरे बैच को प्रभावित करने के फैसले पर कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं.

अब आमरण अनशन का ऐलान

नियुक्ति रद्द होने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया है उनका कहना है कि अगर सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे. कर्मचारियों का साफ कहना है कि वे अपनी नौकरी और भविष्य की लड़ाई अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेंगे. “नौकरी वापस नहीं हुई तो आमरण अनशन करेंगे. हमें अब कोर्ट पर भरोसा है.”

सरकार के सामने दोहरा संकट

JSSC CGL विवाद में अब सरकार के सामने चुनौती और बड़ी हो गयी है. एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें हैं, तो दूसरी तरफ चयनित होकर नौकरी कर रहे करीब 2000 कर्मचारियों का भविष्य है. हालांकि सरकार ने जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति को रद्द करने का फैसला कल कैबिनेट में कर लिया और मुख्यमंत्री ने वकायदा इसका ऐलान भी कर दिया है अब नियुक्त कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी सजा उन युवाओं को क्यों मिले, जिन्होंने अपनी मेहनत और मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की?

अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे विवाद में ऐसा कौन सा रास्ता निकालती है, जिससे आंदोलनकारी छात्रों को न्याय का भरोसा मिले और नौकरी कर रहे युवाओं का भविष्य भी बर्बाद होने से बचे.


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लेखक के बारे में

By वैभव विक्रम

वैभव विक्रम डिजिटल पत्रकार हैं. बीते 5 सालों से झारखंड की सामाचार, खेल, लाइफस्टाइल, एजुकेशन, धर्म में रुचि है और इसी विषय पर अपने विचार प्रकट करना पसंद है. वर्तमान में प्रभात खबर के झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के जिलों की खबरों को कवर कर रहे हैं. इससे पहले वह साल 2023-24 में प्रभात खबर के खेल डेस्क की खबरें लिखा करते थे.

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