पश्चिमी सिंहभूम से रवि शंकर मोहंती की रिपोर्ट
West Singhbhum Accident, चक्रधरपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर शहर से एक दिल दहला देने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां कुदलीबाड़ी मोहल्ले में रहने वाला एक 9 वर्षीय मासूम बच्चा खेलते-खेलते एक बेहद खौफनाक हादसे का शिकार हो गया. खेल के दौरान अचानक एक लोहे का नुकीला त्रिशूल सीधे उसकी पीठ को चीरते हुए अंदर घुस गया, जिससे बच्चा तड़प उठा. बच्चे को दर्द से कराहता देखकर परिजनों में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई. लेकिन, चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल के डॉक्टरों की तत्परता और कुशलता के कारण एक बड़ा चमत्कार हुआ और बच्चे को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
कैसे हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक वाकया रविवार की सुबह का है. कुदलीबाड़ी निवासी प्रेम लमाय का 9 वर्षीय पुत्र निमर लमाय सुबह के वक्त घर के पास ही मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था. इसी दौरान दौड़ने-भागने के क्रम में आंगन के कोने में रखा एक नुकीला त्रिशूल अनियंत्रित होकर सीधे उसकी पीठ में गहरे धंस गया. त्रिशूल घुसते ही निमर दर्द से बुरी तरह चीखने और छटपटाने लगा. बच्चे के रोने की आवाज सुनकर परिजन बदहवास हालत में दौड़कर मौके पर पहुंचे. इसके बाद उन्होंने बिना एक पल गंवाए लहूलुहान बच्चे को उठाया और तुरंत चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल (Sub-Divisional Hospital) की ओर भागे. घायल बच्चे के पिता प्रेम लमाय ने रोते हुए बताया कि यह भयानक हादसा खेल-खेल में हुआ. त्रिशूल वहां आंगन में कैसे आया, इस बात को वे भी समझ नहीं पा रहे हैं.
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अस्पताल में किया गया सफलता पूर्वक किया गया ऑपरेशन
अनुमंडल अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. जेजे मुंडू और ड्रेसर मिथलेश महतो ने मामले की संवेदनशीलता और स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांप लिया. बच्चे की पीठ में त्रिशूल फंसा होने के कारण अत्यधिक खून बह रहा था और उसकी जान को खतरा था. डॉक्टरों ने बिना कागजी औपचारिकता के तत्काल इलाज शुरू किया और सीधे ऑपरेशन थिएटर (OT) की तैयारी की. डॉ. जेजे मुंडू के कुशल नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. बेहद सावधानी बरतते हुए बच्चे की पीठ की मांसपेशियों में फंसे त्रिशूल को शरीर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. सफल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि त्रिशूल शरीर के किसी मुख्य आंतरिक अंग (Internal Organ) तक नहीं पहुंचा था और समय पर अस्पताल पहुंचने की वजह से बच्चे की जान बच गई. फिलहाल निमर की हालत पूरी तरह स्थिर बनी हुई है और उसे डॉक्टरों की कड़े ऑब्जर्वेशन (निगरानी) में वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है.
अस्पताल प्रबंधन ने दी अभिभावकों को नसीहत
अपने इकलौते जिगर के टुकड़े की जान सुरक्षित बच जाने पर पीड़ित माता-पिता और पूरे परिवार ने राहत की लंबी सांस ली है. पिता प्रेम लमाय ने नम आंखों से अस्पताल प्रबंधन, डॉ. मुंडू और पूरी मेडिकल टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि अगर आज डॉक्टरों ने इतनी तत्परता न दिखाई होती तो शायद उनके बेटे की जान नहीं बच पाती. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के बाद अनुमंडल अस्पताल प्रबंधन ने आम जनता और खासकर माता-पिता से एक विशेष अपील की है. अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि छोटे बच्चों पर हमेशा नजर रखें और उन्हें खेलते समय घर या आंगन के आस-पास किसी भी प्रकार की नुकीली, धारदार या खतरनाक चीजों (जैसे त्रिशूल, कुल्हाड़ी, रॉड या कांच) से बिल्कुल दूर रखें, ताकि भविष्य में इस तरह के किसी भी अनपेक्षित और जानलेवा हादसे से बच्चों को बचाया जा सके.
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