6 करोड़ से बने झारखंड-ओडिशा को जोड़ने वाले इस पुल पर महुआ सुखा रहे ग्रामीण

झारखंड के तत्कालीन सीएम मधु कोड़ा के प्रयास से झारखंड और ओडिशा को जोड़ने के लिए कोयल नदी पर छह करोड़ की लागत से 2009 में उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया गया था.

मनोहरपुर, राधेश सिंह राज : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड के धानापाली गांव स्थित कोयल नदी पर छह करोड़ की लागत से बने पुल पर लोग महुआ सूखा रहे हैं. 15 साल पहले बना पुल अबतक दो बार धंस चुका है.

ऐसे में पुल से वाहनों के आवागमन पर रोक लगाकर प्रशासन चुप बैठ गया है. अब पुल दो साल से स्थायी रूप से महुआ सुखाने के काम आ रहा है. पिछले साल पथ प्रमंडल विभाग की टीम ने पुल का सर्वे किया था. उस समय विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बगल में नया पुल बनाने के लिए डीपीआर तैयार कर ली गयी है. अभी तक स्थिति जस की तस है.

पुल धंसने के बाद एक पिलर में दरार आ गयी है. पुल की मरम्मत कर दोबारा चालू करना अब नामुमकिन है. झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के प्रयास से झारखंड और ओडिशा को जोड़ने के लिए कोयल नदी पर छह करोड़ की लागत से 2009 में उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया गया था.

पुल बन जाने से क्षेत्र के किसानों को ओडिशा के राउरकेला में बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद थी. प्रखंड के किसानों ने राउरकेला जाकर सब्जी का व्यापार भी शुरू कर दिया था. परंतु किसानों की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी.

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दो साल से भारी वाहनों के परिचालन पर रोक

ग्रामीणों की मानें, तो यह पुल 15 साल में दो बार धंस चुका है. पहली बार वर्ष 2012 में धंसा. कुछ साल बाद पुल की मरम्मत कराने के बाद आवागमन बहाल की गयी. फिर, वर्ष 2022 में पुल दूसरी बार धंस गया. इसके बाद पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गयी. दो पहिया वाहन चालक जान हथेली पर लेकर पुल जरूर पार करते हैं.

ग्रामीणों ने की चुनाव बहिष्कार की घोषणा

पुल से बड़े वाहनों की आवाजाही बंद किये जाने के बाद धानापाली, कोलपोटका, बारंगा, रायकेरा समेत प्रखंड की अन्य पंचायतों के किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है. नाराज ग्रामीण अब लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है. ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी बार पुल धंसने के बाद इसकी सुध लेने सांसद और विधायक आजतक नहीं आये.

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दो साल में 4 बार सर्वे हुआ, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा

दो साल में पुल का चार बार सर्वे किया गया, परंतु धरातल पर कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है. ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि अगली बरसात में जलस्तर बढ़ने पर पुल जमींदोज हो सकता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रखंड के किसानों को राउरकेला जाने के लिए 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. ऐसे में उनका अतिरिक्त समय के साथ पैसे की भी बर्बादी हो रही है.

पुल धंसने के बाद आज तक कोई झांकने तक नहीं आया. ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत की है, परंतु कोई पहल नहीं की गयी. ग्रामीणों की मांग जायज है. लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जायेगा. जरूरत पड़ी, तो विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया जायेगा.

अजीत तिर्की, मुखिया, कोलपोटका पंचायत

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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