झारखंड के चाईबासा में आज भी जिंदा हैं बापू की यादें: खाटिया छोड़ चटाई पर बैठ गए थे महात्मा गांधी, मिट्टी की हांडी वाली चाय का लिया स्वाद

Mahatma Gandhi Death Anniversary 2026: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और चाईबासा का रिश्ता बेहद खास है. 1925 की अपनी यात्रा के दौरान बापू ने चाईबासा गोशाला में सादगी की मिसाल पेश की थी. पढ़िए उनकी अनमोल धरोहर, डायरी में दर्ज संदेश और गौ सेवा को लेकर उनके वो सुझाव जो आज भी जीवित है.

Mahatma Gandhi Death Anniversary 2026, चाईबासा: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का झारखंड के चाईबासा से गहरा नाता रहा है. देश की आजादी के संकल्प को लेकर वर्ष 1925 में जब गांधी जी चाईबासा पहुंचे थे, तो उनकी सादगी और विचारों ने स्थानीय लोगों पर गहरी छाप छोड़ी थी. अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान बापू ने चाईबासा गोशाला का भ्रमण किया था और वहां की व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा की थी. आज भी गोशाला की दीवारों और वहां की परंपराओं में गांधी जी की स्मृतियां जीवंत हैं.

खटिया की जगह चटाई को दी प्राथमिकता

गोशाला के पूर्व अध्यक्ष मधुसूदन अग्रवाल पुरानी यादों को साझा करते हुए बताते हैं कि जब गांधी जी का गोशाला में आगमन हुआ, तो संस्थापक दिवंगत बारसी दास पसारी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. बापू के बैठने के लिए विशेष रूप से एक चारपाई (खटिया) का प्रबंध किया गया था. लेकिन, सादगी के प्रतिमान बापू ने खाट पर बैठने से विनम्रतापूर्वक मना कर दिया. उन्होंने ताड़ और खजूर के पत्तों से बनी चटाई पर बैठने की इच्छा जताई. आनन-फानन में उनके लिए चटाई बिछाई गई, जिस पर बैठकर उन्होंने कहा था कि “यह एक पुण्य की जगह है.”

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मिट्टी की हांडी वाली चाय और ताजा दूध का स्वाद

अग्रवाल बताते हैं कि बापू को गोशाला में मिट्टी की हांडी में बनी चाय और गाय का ताजा दूध परोसा गया था. दूध की शुद्धता और चाय के स्वाद से प्रभावित होकर गांधी जी ने इसे ”अमृत” के समान बताया था. उन्होंने कहा था कि स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए देश को ऐसे ही शुद्ध खान-पान की बहुत आवश्यकता है. इसके बाद उन्होंने गोशाला की गायों को स्नेहपूर्वक सहलाया और उनके प्रति अपना प्रेम प्रकट किया. जाते-जाते उन्होंने गोशाला की डायरी में अपना संदेश लिखकर हस्ताक्षर भी किए थे, जो आज भी एक अनमोल धरोहर है.

गांधी जी ने किसकी पीठ थपथपायी थी

गोशाला की सुदृढ़ व्यवस्था को देखकर गांधी जी ने संस्थापक बारसी दास पसारी की पीठ थपथपाई थी. उन्होंने कहा था : तुम बहुत नेक कार्य कर रहे हो, गाय की सेवा सबसे बड़ी सेवा है. गांधी जी ने तब एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया था कि गाय की मृत्यु के बाद उसके शरीर का अनादर नहीं होना चाहिए. उन्होंने सलाह दी थी कि गाय को पूरे सम्मान के साथ दफनाया जाये और शव पर नमक डाल दिया जाये, ताकि कोई जंगली जानवर उसे नुकसान न पहुंचा सके.

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लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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