चक्रधरपुर में िबजली का हाल. नियमित बिल जमा करने पर भी इंस्टॉलमेंट में मिल रही बिजली
चक्रधरपुर : चक्रधरपुर में बिजली की अनियमित आपूर्ति से लोग त्रस्त हैं. गरमी के इस मौसम में स्थिति ऐसी है कि 24 घंटे में बमुश्किल 6 से 8 घंटे बिजली लोगों को मिल रही है. एक सप्ताह के आंकड़े पर गौर करें, तो शहरी क्षेत्र में 65-70 घंटे ही बिजली आपूर्ति हुई है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थित और भी दयनीय है. ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिदिन मात्र तीन से चार घंटे ही बिजली रह रही है. इसका एक मात्र कारण शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बिजली तारों का जर्जर होना है.
प्रतिदिन दर्जनों बार बिजली के तार टूटने की घटनाएं होती हैं. विभाग द्वारा सिर्फ संसाधन व कर्मचारी की कमी का रोना रोया जाता है. इस कारण दिनोदिन बिजली की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन इसके सुधार की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है. विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि पिछले कई रातों में बिजली केवल दर्शन भर के लिए आयी है.
विभाग में कर्मचारियों की घोर कमी : एसडीअो. बिजली विभाग के एसडीओ राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि विभाग के पास कर्मचारियों की घोर कमी है. इस कारण मेंटेनेंस का कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पाता है. ऊपर से जितनी बिजली मिलनी चाहिए, मिल नहीं रही है. मात्र दो स्थायी कर्मचारी को लेकर विभाग काम का चल रहा है. अनुमंडल में कुल 38 दैनिक कर्मचारी है. आये दिन दर्जनों जगह तार टूटने, पोल गिरने जैसे समस्याएं होती रहती हैं. कर्मचारियों की अभाव में टूटे तार को जोड़ने समेत अन्य कार्यों में काफी समय लग जाता है. इस कारण बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहता है. टोकलो, कराईकेला, चारमोड़, देवगांव आदि स्थानों में लाइन में कई तरह की समस्या आयी है. सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता प्रभावित है.
क्या कहते हैं उपभोक्ता
बिजली की बदहाल स्थिति को लेकर विभाग को अपनी कार्यशैली बदलने की जरूरत है. भीषण गरमी में विभाग ग्रामीण क्षेत्र में मात्र 3-4 घंटे बिजली दे रही है.
सूरज प्रधान, उपभोक्ता
नियमित बिल जमा करने के बावजूद स्टॉलमेंट में बिजली मिलती है. खास कर गरमी के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है. विभाग द्वारा जिस तरह बिल दिया जाता है.
पंकज गुप्ता, उपभोक्ता
बिजली विभाग की आंखमिचौनी से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है. एक तरफ भीषण गरमी तो, दूसरी तरफ बिजली का कटना. उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.
दुष्यंत नापित, उपभोक्ता
