माओवादियों के साथ मच्छरों से भी लड़ेंगे जवान

चाईबासा : सीआरपीएफ व पुलिस के जवानों को दिया गया मलेरिया जांच का प्रशिक्षण चाईबासा : सारंडा में सीआरपीएफ जवान को दो ‘ म ‘ से लड़ना पड़ता है. एक ‘ म ‘ का मतलब होता है माओवादी. दूसरे ‘ म ‘ का अर्थ है मच्छर. माओवादियों को हर मोर्चे पर शिकस्त देने वाले सीआरपीएफ […]

चाईबासा : सीआरपीएफ व पुलिस के जवानों को दिया गया मलेरिया जांच का प्रशिक्षण

चाईबासा : सारंडा में सीआरपीएफ जवान को दो ‘ म ‘ से लड़ना पड़ता है. एक ‘ म ‘ का मतलब होता है माओवादी. दूसरे ‘ म ‘ का अर्थ है मच्छर. माओवादियों को हर मोर्चे पर शिकस्त देने वाले सीआरपीएफ जवानों को जंगल के अंदर मच्छर अपनी चपेट में ले लेते हैं.
मच्छर के काटने से जवान मलेरिया से ग्रसित हो जाते हैं. जंगल के अंदर लंबे समय तक ऑपरेशन चलता है. जवानों को लंबी अवधि तक जंगल के अंदर ही रहना होता है. ऐसे में बार-बार जंगल से बाहर आकर इलाज कराना या चेकअप कराना मुश्किल भी है और सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक भी है. इस समस्या को देखते हुए सीआरपीएफ व पुलिस के जवानों को मलेरिया से भी खुद लड़ने के लिए योजना तैयार की गयी. तय हुआ कि पुलिस के जवानों व सीआरपीएफ को प्रशिक्षित कर मलेरिया जांच करने की विधि सिखायी जायेगी.
मलेरिया के बचाव के लिए उपचार भी बताये जायेंगे. इस कड़ी में सोमवार को सदर अस्पताल में सीआरपीएफ व पुलिस के जवानों को प्रशिक्षित किया गया. जिसमें, मलेरिया के लक्षण, जांच तथा जांच के बाद कौन सी दवा का सेवन करना है, इसकी भी जानकारी दी गयी. विशेषज्ञ चिकित्सकों व ब्लड जांच के तकनीकी विशेषज्ञों ने जवानों को प्रशिक्षित किया. मौके पर चक्रधरपुर एएसपी कमल कुमार, सिविल सर्जन डॉ हिमांश भूषण बरबार, मलेरिया पदाधिकारी डॉ संजय कुजूर अहसान फारूक, मलेरिया निरीक्षक महादेव राम समेत सारंडा, टोंटों, पोड़ाहाट, झींकपानी, मनोहरपुर, टोकलो, बंदगांव, गोइलकेरा क्षेत्रों के पुलिस व सीआरपीएफ जवान मौजूद थे.
अब खुद से मलेरिया जांच व मलेरिया की दवा लेने में सक्षम होंगे जवान
मलेरिया से बचाव को जवानों को ये करना है
एलआरपी में जाने समय बदन को पूरा ढंकने वाला कपड़ा पहना होगा
कैंप के पास नीम या बेगना पत्ता जलाना होगा
पीने के पानी को ढंककर रखना होगा. एक सप्ताह में पानी को बदलना होगा
कैंप के आसपास के गड्ढे को मिट्टी डालकर समतल करना होगा.
लक्षण पाये जाने पर व पीएल जांच करेंगे जवान
मलेरिया के लक्षण होने
पर पीवी व पीएल दो तरह के जांच होते हैं
दोनों जांच का प्रशिक्षण जवानों को दिया गया
पीएल व पीवी में कौन सी दवा लेना होगा, यह भी बताया गया
मलेरिया किट से जवानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया.
कैंप में मलेरिया जांच किट दें स्वास्थ्य विभाग : एएसपी
चक्रधरपुर एएसपी कमल कुमार ने कहा कि अगर पूरी तरह से जवान प्रशिक्षित हो जाते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग किट व दवा कैंपों में उपलब्ध कराये. जिससे, कैंप में ही इलाज हो सके.
कैंप में पहुंचायी जायेगी किट व दवा : सीएस
सिविल सर्जन डॉ हिमांशु भूषण बरबार ने कहा कि सीआरपीएफ कैंप में दवा व किट उपलब्ध करायी जायेगी, ताकि जवान खुद से कैंप में ही जांच व दवा कर सकें.

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