मनोहरपुर. आदिवासी कुड़मी समाज के रास मिलन समारोह में पहुंची तीरंदाज पूर्णिमा महतो, कहा
मनोहरपुर : तीरंदाजी कोच पूर्णिमा महतो ने कहा कि कुड़मी समाज को अपनी भाषा, संस्कृति व परंपरा को बचाते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है. इसमें समाज के युवा भूमिका अहम निभा सकते हैं. युवा समाज के उत्थान के लक्ष्य पर निशाना साधते हुए आगे बढ़ें. वे प्रखंड के उंधन सामाजिक भवन में रविवार को आदिवासी कुड़मी समाज की अोर से आयोजित रास मिलन समारोह को संबोधित कर रही थीं. समारोह का शुभारंभ उंधन स्थित निर्मल महतो चौक पर निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं आयोजनस्थल पर समाज के स्वर्गीय बुजुर्गों की तसवीर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया
. समारोह में मुख्य रूप से भाषा व संस्कृति को बचाने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कोच पूर्णिमा महतो ने कहा कि कोई भी समाज, धर्म, परिवार, राज्य व राष्ट्र अपनी भाषा व संस्कृति को छोड़ कर आगे नहीं बढ़ सकता. कुड़मी समाज को भी एकजुट हो आगे बढ़ने की जरूरत है.
इसके लिए समाज को शिक्षित होना होगा. उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज में कुरीतियों व नशापान के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. हमें इन सब से दूर रहने के लिए दृढ़ संकल्पित होना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि समाज के शिक्षा के साथ खेल को भी प्राथमिकता देनी होगी, स्वस्थ व सुदृढ़ समाज में शिक्षा के साथ-साथ खेल का भी विशेष महत्व है.
समारोह का संचालन सरोज महतो व लक्ष्मी महतो ने किया. नृत्य मंडलियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. पुरस्कार वितरण समाजसेवी संतोष महतो ने किया. मौके पर ओमप्रकाश महतो, भुवन महतो, गणेश्वर महतो, राजबिहारी महतो, कार्तिक महतो, लक्ष्मीनारायण महतो, अनिल महतो, मंजू देवी, मुरलीधर महतो, लंकज महतो, नकुलचंद्र महतो, कदम बिहारी महतो, सचिन महतो, अनादि महतो के अलावा कुड़मी समाज के महिला, पुरुष व बच्चे उपस्थित थे.
नृत्य मंडलियों ने खूब बटोरी तालियां :रास मिलन समारोह पर विभिन्न नृत्य मंडलियों ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसका दर्शकों ने जमकर सराहना की. संत अगस्तीन कॉलेज, घाघरा, कमारबेड़ा, महुलडीहा, तरतरा समेत विभिन्न गांवों की नृत्य मंडलियों ने पंता नृत्य, कुड़माली नृत्य व गीत प्रस्तुत किया. ढोल व नगाड़े की थाप पर जमकर नृत्य किया. खासकर छोटी बच्चियों के नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया.
