खुलासा. डीएसपी ने संस्था के प्रतिनिधि से की पूछताछ, एफआइआर होना तय
इंस्पेक्टर की जांच व डीएसपी की पूछताछ में हुआ खुलासा
जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर प्रखंड की 22 सहित 37 युवतियों को मंथन संस्था बिना प्रशासनिक अनुमति के सिलाई काम के लिए तमिलनाडु ले जा रही थी. मंथन संस्था के संचालन की जानकारी जगन्नाथपुर थाना या अन्य सरकारी कार्यालय में नहीं है. इसका खुलासा बुधवार को नोवामुंडी इंस्पेक्टर आनंद मिंज की जांच से हुआ. आनंद मिंज की जांच के बाद जगन्नाथपुर डीएसपी मनोज झा ने जगन्नाथपुर थाना में मंथन संस्था के प्रतिनिधि को बुलाकर पूछताछ की. बिना अनुमति के तमिलनाडु ले जाने के सवाल पर संस्था के प्रतिनिधि जवाब नहीं दे सके. ऐसे में संस्था पर मानव तस्करी और बाल श्रम कानून के तहत एफआइआर होना तय है. पुलिस व प्रशासन कुछ और कागजात खंगालने के बाद संस्था को बैन करने की कवायद करेगी.
उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले मनोहरपुर में 37 युवतियों को एलेप्पी ट्रेन से उतारकर प्रशासन के हवाले किया गया था.
मंथन का थाना से लेकर सरकारी कार्यालय में रिकॉर्ड नहीं
पुलिस पर भी उठ रहे सवाल
प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के अनुसार मंथन संस्था बिना आदेश व रिकॉर्ड के दो साल से जगन्नाथपुर में अपना कार्य संचालित कर रही है. इसमें सच्चाई है, तो प्रशासन व पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न है. प्रशासन व पुलिस की ओर से लगातार मॉनीटरिंग की जाती तो, अवैध तरीके बच्चियों को दूसरे स्थान पर ले जाने की कवायद बहुत पहले रोकी जा सकती थी. फिलहाल, नोवामुंडी और जगन्नाथपुर में इस तरह के अन्य संगठनों की जांच की जरूरत है.
बिना अनुमति के बच्चियों को ले जाया जा रहा था. पूरे मामले की जांचकर तह तक पहुंचा जा रहा है. मामले में दोषी पर निश्चित कार्रवाई होगी.
– मनोज झा, डीएसपी, जगन्नाथपुर
अभिभावकों को सौंपी गयीं 22 बच्चियां
एलेप्पी एक्सप्रेस से उतारी गयीं 37 बच्चियों में 22 बच्चियां जगन्नाथपुर क्षेत्र की हैं. बुधवार को सभी 22 बच्चियों को उनके अभिभावक के हवाले कर दिया गया. थाना प्रभारी लक्ष्मी कुमारी ने अभिभावकों को बच्चियों ख्याल रखने की हिदायत दी. इस तरह की संस्था द्वारा दूसरे प्रदेश में ले जाने पर थाना में सूचित करने को कही.
