चक्रधरपुर : चक्रधरपुर बीआरसी में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा (क्वालिटी एजुकेशन) विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया. जिसके मुख्य अतिथि प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी श्रीमती तेजिंदर कौर और मुख्य वक्ता झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अंचल सचिव अनिल देहुरी थे. बीईईओ श्रीमती कौर ने कहा कि पदाधिकारी से नहीं ईश्वर से डरें. पदाधिकारी का डर क्षणिक होता है. इससे आप में सुधार नहीं हो सकता. लेकिन जो ईश्वर से डरेगा, उसे एहसास होगा कि वह कहां-कहां गलत कर रहा है और जब भी गलती का एहसास होगा, ईश्वर से डरेगा. उन्होंने कहा कि शिक्षकों में जो भी गुण है,
उसे पूरी इमानदारी से धरातल पर उतारेंं, इसका परिणाम अवश्य सामने आयेगा. श्री देहुरी ने अपने संबोधन में कहा कि थ्री एच को हमेशा मजबूत रखें. अर्थात हैंड, हेड व हार्ट अगर सजग रहेगा तो कभी भी किसी भी क्षेत्र में कमजोरी महसूस नहीं होगी. शिक्षक वही सफल होता है जो समय का पाबंद और कर्तव्य के प्रति गंभीर होता है. जिस विषय को आप पढ़ाते हैं, उसे दोहरायें जरूर. आप में जितना भी ज्ञान है, उतना बच्चों को भी जरूर दें.
शिक्षा में विकास का एक मुख्य कारण सहगामी क्रियाओं को अपनाना है. इसके तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद, प्रतियोगिताएं व वार्षिक उत्सव आदि का आयोजन जरूर करें. सीसीई के तहत पूरे एक साल का प्रोजेक्ट तैयार रहता है. एफए-1 से एफए-4 तक और एसए-1 से एसए-2 तक के कार्यक्रमों को इमानदारी पुर्वक अपनाओ. उन्होंने कहा कि शिक्षकों में यह सोच होनी चाहिए कि सरकारी स्कूलों में गरीब के बच्चे पढ़ते हैं, जिसकी इज्जत व शिक्षा शिक्षक के हाथों में है. क्वालीटी एजुकेशन देने वालों की कभी भी बदनामी नहीं होती है. इस अवसर शिक्षक कंचन यादव ने भी अगली परिचर्चा में अपने विचार रखने के लिए चयन किये गये. परिचर्चा में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे.
