चक्रधरपुर से अनिल तिवारी की रिपोर्ट
West Singhbhum News: डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती पर चक्रधरपुर के गोविंदपुर में माझी-परगना भवन में एक बैठक हुई. इसमें आदिवासी अधिकार, जमीन की सुरक्षा और समाज के विकास पर चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि कानूनों को सही तरीके से लागू करना बहुत जरूरी है. साथ ही इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, जमीन की सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण पर गंभीर मंथन किया गया.
संविधान की कमियों पर वक्ता का बयान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व आईएएस अधिकारी, समाजसेवी और कोल्हान रक्षा संघ के अध्यक्ष डिबार जोंको ने अपने संबोधन में संविधान की कमियों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट 1996 को उसकी मूल भावना के साथ धरातल पर नहीं उतारा गया है. उन्होंने कहा कि इन कानूनों का सही तरीके से पालन न होना समाज के पिछड़ेपन का बड़ा कारण है.
स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने की अपील
उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि इन मुद्दों को केवल चर्चा तक सीमित न रखकर कानूनी और प्रशासनिक मंचों पर मजबूती से उठाया जाए. श्री जोंको ने कोल्हान क्षेत्र के सभी सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे आपसी मतभेद छोड़कर आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एकजुट हों, क्योंकि यही व्यवस्था उनके अस्तित्व की ढाल है.
समाज की समस्याएं और समाधान पर चर्चा
कार्यक्रम को दो सत्रों में बांटा गया. पहले सत्र में आर्थिक पिछड़ापन, शिक्षा की कमी, सामाजिक जागरूकता की कमी और जमीन की असुरक्षा को प्रमुख समस्याओं के रूप में रखा गया. दूसरे सत्र में समाधानों पर चर्चा करते हुए जुगसलाई-तोरोफ परगना दासमत हांसदा ने कहा कि बदलती डेमोग्राफी के बीच हमें आर्थिक और तकनीकी रूप से सक्षम होना होगा. वहीं, टीएसी सदस्य जोसाई मार्डी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पद अस्थायी हैं, जबकि हमारी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था ही स्थायी शक्ति है. रविंद मंडल ने कहा कि किसी भी समाज का विकास तब होगा जब लोग शिक्षित होंगे. हमें अपने बच्चों को उचित शिक्षा देने की जरूरत है जिससे वे अपने अधिकार को जान सके.उन्होंने कहा आज शिक्षा ही एक ऐसी कुंजी है जो हमें हमारा अधिकार दिला सकता है.
माझी बाबाओं ने शिक्षा को ही एकमात्र समाधान बताया
कार्यक्रम में माझी बाबाओं ने शिक्षा को ही एकमात्र समाधान बताया. मदन बास्के (कुल्हुडीह) ने भावुक अपील करते हुए कहा, “चाहे एक वक्त का खाना कम खाएं, लेकिन बच्चों को स्कूल जरूर भेजें. इस अवसर पर धाड़-दिशोम देश परानिक दुर्गा चरण मुर्मू, पातकोम-दिशोम देश परगना रामेश्वेर बेसरा, सिंज-दिशोम देश परगना फुकीर मोहन टुडू, समाजसेवी नियरेन हेरेंज, नवीन मुर्मू और दुर्गा हेंब्रम जी का मुख्य भूमिका रहे, व्यक्ति नूना राम माझी चंद्र मोहन मुर्मू, पूनम हेंब्रम अधिवक्ता, जय सिंह हेंब्रम, मानसिंह हेंब्रम, रविंद्र मंडल, बबलु गगराई, सुश्री सुमित्रा जोंको,सहित कुचुंग-दिशोम के परगना पिथो मार्डी, नवीन मुर्मू और विभिन्न गांवों के 80 से अधिक माझी बाबा मौजूद थे.
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