नोवामुंडी के टाटा स्टील टॉप कैंप में दिनदहाड़े ठगी, 4 लाख के गहने लेकर फरार हुए बदमाश

Noamundi News: नोवामुंडी के टाटा स्टील टॉप कैंप में ठगों ने कंपनी स्टाफ बनकर महिला को झांसा दिया और 4 लाख के गहने लेकर फरार हो गए. बर्तन साफ करने के बहाने घर में घुसे आरोपियों ने चालाकी से वारदात को अंजाम दिया. घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

Noamundi News: पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी के टाटा स्टील टॉप कैंप इलाके में दिनदहाड़े हुई ठगी की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है. सुबह करीब 10:00 से 11:00 बजे के बीच हुई इस वारदात में शातिर ठगों ने बेहद चालाकी से एक परिवार को अपना शिकार बनाया और लाखों रुपये के गहने लेकर फरार हो गए. घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

उजाला कंपनी का स्टाफ बनकर पहुंचे ठग

जानकारी के अनुसार, दो युवक खुद को “उजाला कंपनी” का स्टाफ बताकर टॉप कैंप स्थित क्वार्टर नंबर 67 बी में पहुंचे. उन्होंने घर में प्रवेश करते ही अपनी बातों और व्यवहार से महिला का भरोसा जीतने की कोशिश शुरू कर दी. पहले उन्होंने तांबा और पीतल के बर्तनों को साफ कर चमकाकर दिखाया. इसके बाद चांदी के पायल को साफ कर सुरक्षित वापस कर दिया. इस तरह उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे भरोसेमंद हैं और किसी प्रकार का खतरा नहीं है.

भरोसा जीतकर बनाया बड़ा निशाना

ठगों की चालाकी इतनी सटीक थी कि घर की महिला विदिशा गोराई पूरी तरह उनके झांसे में आ गईं. इसके बाद ठगों ने असली खेल शुरू किया और महिला से सोने के गहने साफ करने के नाम पर मांगे. महिला ने करीब 25 ग्राम सोने के गहने, जिनकी संख्या लगभग 16 थी, उन्हें सौंप दिए. इन गहनों की कीमत करीब 4 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है.

सबसे खतरनाक चाल: पानी लाने का बहाना

ठगों ने गहनों पर पाउडर और हल्दी लगाने का नाटक किया और फिर महिला से कहा कि वह पानी लेकर आए. जैसे ही महिला पानी लाने के लिए अंदर गई, ठगों ने मौके का फायदा उठाकर सारे गहने चुपचाप अपनी जेब में रखे. जब महिला वापस आई, तो ठगों ने उसे झांसा देते हुए कहा कि गहनों को कुकर में डाल दिया गया है. उन्होंने महिला को निर्देश दिया कि कुकर में पानी और हल्दी डालकर उसे बंद कर दें और 30 मिनट तक गर्म होने दें.

30 मिनट बाद खुली ठगी की परत

ठग कुछ देर रुकने का बहाना बनाकर वहां से फरार हो गए. महिला को जब तक कुछ समझ आता, तब तक काफी देर हो चुकी थी. करीब 30 मिनट बाद जब महिला ने कुकर खोला, तो उसमें कोई गहना नहीं था. यह देख उसके होश उड़ गए और वह घबरा गई. उसे समझ में आ गया कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है.

तुरंत अलर्ट, लेकिन हाथ नहीं लगे ठग

घटना के तुरंत बाद महिला ने अपने पति उत्तम गोराई को इसकी जानकारी दी. इसके बाद टाटा स्टील की सुरक्षा टीम को अलर्ट किया गया. सुरक्षा के तहत मेन गेट को सील कर जांच की गई, लेकिन तब तक ठग मौके से काफी दूर निकल चुके थे. सारी कोशिशों के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल सका.

ठगों का हुलिया

पीड़ित परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ठगों में एक व्यक्ति काले रंग की शर्ट और ब्लैक पैंट पहने हुए था, जिसकी उम्र करीब 40 से 50 वर्ष के बीच थी. दूसरा व्यक्ति लंबा कद का था और उसकी उम्र लगभग 40 वर्ष बताई गई है. पुलिस ने इन विवरणों के आधार पर जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में पूछताछ की जा रही है.

पुलिस जांच में जुटी, शिकायत दर्ज

घटना के बाद थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और ठगों की तलाश में जुटी हुई है. आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके.

ठगी का नया तरीका बना चिंता का कारण

यह घटना इस बात का संकेत है कि ठग अब नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं. “फ्री सफाई”, “कंपनी स्टाफ” और “ऑफर” जैसे बहाने बनाकर लोगों का भरोसा जीतना और फिर मौके का फायदा उठाकर कीमती सामान लेकर फरार हो जाना अब आम होता जा रहा है.

जनता के लिए जरूरी सावधानियां

ऐसी घटनाओं से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. अनजान व्यक्तियों को घर में प्रवेश देने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करनी चाहिए. आईडी कार्ड दिखाने पर भी तुरंत भरोसा न करें और किसी भी हालत में अपने कीमती सामान को किसी अनजान व्यक्ति के हाथ में न दें. साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें.

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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

दिनदहाड़े हुई इस घटना ने टाटा स्टील टॉप कैंप की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. इतनी बड़ी ठगी के बावजूद आरोपियों का आसानी से फरार हो जाना सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है. स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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