मनोहरपुर : सारंडा में व्याप्त समस्याओं को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकार ने सारंडा एक्शन प्लान चलाया गया. जो औने-पौने धरातल पर उतरा भी. प्रखंड के रोंगो गांव की समस्या सारंडा की समस्याओं से ही सरोकार रखती है.दुर्भाग्य है कि सरकार व प्रशासन की आंखों में यहां की समस्या बौनी नजर आती है.
सरकार की उपेक्षा व उदासीनता का शिकार रोंगो गांव के ग्रामीणो ने अपने बूते सरकार व प्रशासन को आईना दिखाते रहे हैं. 2010 के करीब (जब सारंडा एक्शन प्लान शुरू हुआ) यहां के ग्रामीणों ने खुद अपने गांव तक जाने वाले सात किलोमीटर सड़क का निर्माण पहाड़ों का सीना चीर कर करना शुरु कर दिया. महज कुछ ही समय में पहाड़ों को काट कर गड्ढ़ों को भरकर अपने गांव तक सड़क निर्माण कर डाला. तब से अब तक प्रत्येक वर्ष अरवाकोचा-रोगों(सात किलोमीटर) सड़क को दो बार मरम्मत के तौर पर निर्माण करना पड़ता है. कच्ची सड़क व प्राकृतिक मार व आवागमन के कारण प्रत्येक छ: माह में सड़क की मरम्मत करनी पड़ती है.
विगत 26 मई को भी इस सड़क को पुन: मरम्मती का काम शुरु किया गया था. जिसे पांच जून को पूर्ण कर लिया गया. इस कार्य में गांव के सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीणों ने इस सात किलोमीटर सड़क निर्माण में भूमिका अदा की.रोंगो गांव लगभग 100 ग्रामीणों ने श्रमदान किया. पथरीले, पहाड़ी, उबड़-खाबड़ उक्त सड़क को चलने योग्य फिर से बनाने के लिये गांव के ग्रामीणों ने तीन ग्रुप के तहत विभाजित होकर सड़क निर्माण में अपना श्रमदान किया.उक्त सड़क का पुनर्निर्माण वर्ष में दो बार किया जाता है, एक बार गर्मी में और एक बार बरसात खत्म होने के बाद.
