बंगाल व ओड़िशा इलाज बंद कर दें, तो मरीजों का मरना तय

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड की महुलडांगरी, बामडोल, मौदा एवं बनकाटा उप स्वास्थ्य केंद्र खंडहर में तब्दील हो गया है. आलीशान भवन के खिड़की-दरवाजे टूट रहे हैं. भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है. इन केंद्रों में सामन्य चिकित्सा की व्यवस्था भी चरमरा गयी है. पाथरी, मौदा एवं बामडोल इन तीन पंचायत में लगभग 15 हजार […]

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड की महुलडांगरी, बामडोल, मौदा एवं बनकाटा उप स्वास्थ्य केंद्र खंडहर में तब्दील हो गया है. आलीशान भवन के खिड़की-दरवाजे टूट रहे हैं. भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है. इन केंद्रों में सामन्य चिकित्सा की व्यवस्था भी चरमरा गयी है. पाथरी, मौदा एवं बामडोल इन तीन पंचायत में लगभग 15 हजार की आबादी है, मगर उसमें किसी यहां किसी प्रकार की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. कई उपकेंद्रों में सप्ताह में एक दिन एएनएम दिखाई देती है तथा कई केंद्रों में तो वह भी नहीं. इन तीन पंचायतों में सामन्य एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोग निवास करते हैं. मगर यहां स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है.

बीमार पड़ने पर मरीजों को लेने आना पड़ता है दस किमी दूर बहरागोड़ा सीएचसी : इन तीन पंचायतों के लोगों को सामन्य बीमारी के लिए भी दस किमी चलकर बहरागोड़ा सीएचसी आना पड़ता है. यहां के लोगों को बुखार, सर्दी, खांसी जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी सीएचसी पर निर्भर रहते हैं. पंचायतों के गांवों में सिर्फ नाम का उप स्वास्थ्य केंद्र है, काम का नहीं. गंभीर बीमारी होने पर इन पंचायतों के लोग ओड़िशा के बारीपदा जाते हैं. बहरागोड़ा के सरकारी चिकित्सा व्यवस्था चरमरा जाना लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.

क्या कहते हैं ग्रामीण : इन तीन पंचायतों के ग्रामीणों का कहना है कि यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर हो गयी है. सामान्य इलाज के लिए भी सीएचसी जाना पड़ता है.

तब उप स्वास्थ्य केंद्र किस काम के लिए हैं. गंभीर बीमारी होने से मरीज को पश्चिम बंगाल या फिर ओडि़शा के अस्पतालों में भर्ती किया जाता है. यहां के गरीब लोग बंगाल और ओड़िश के भरोसे ही जीवित हैं. अगर पड़ोसी राज्य झारखंड के मरीजों का इलाज करना बंद कर दे तो यहां के मरीजों का मरना तय है.

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